0
दूर दराज के बड़े बड़े जगहों की बातें तो मैंने बहुत कर ली, लेकिन अब बारी है अपने ही राज्य झारखण्ड की। यूँ तो पहाड़ो और नदियों से परिपूर्ण ये जगह किसी जन्नत से कम नहीं लेकिन पर्यटन के समुचित विकास के अभाव में ये क्षेत्र अभी देश के बाकी मुसाफिरों से अछूता ही है। चलिए आज मैं आपको ले चलूँगा जमशेदपुर से सटे पहाड़ों की गोद में जहाँ पहुँच कर आप भी इस झारखंडी छटा में कहीं ग़ुम हो जायेंगे।
तो कुछ ही महीने पहले
दोस्तों के साथ हम चले थे दलमा की उबड़ खाबड़ पैदल राहों में। चोटी पर जाने के लिए पैदल और गाड़ी दोनों तरीके उपलब्ध है लेकिन पैदल का अपना एक अलग मजा है। दलमा की तराई में सबने अपना अपना मोटरसाइकिल रखा और निकल पड़े इस झारखंडी पर्वतारोहण में। दलमा एक वन्य जीव अभ्यारण्य भी है जहाँ किसी जमाने में बहुत सारे जंगली जानवरों का बसेरा हुआ करता था लेकिन हमारे तथाकथित विकास की चकाचौंध ने उनका विकास
  1. चांडिल बाँध - जमशेदपुर के आस पास के नज़ारे (Chandil Dam, Jharkhand)
  2. पारसनाथ: झारखण्ड की सबसे ऊँची चोटी  (Parasnath Hills, Jharkhand)
  3. एक सफर नदी की धाराओं संग (River Rafting In The Swarnarekha River, Jamshedpur)
  4. कुछ लम्हें झारखण्ड की पुकारती वादियों में भी (Dalma Hills, Jamshedpur)
  5. झारखण्ड की एक अनोखी घाटी ( Patratu Valley, Ranchi)
  6. चाईबासा का लुपुंगहुटू: पेड़ की जड़ों से निकलती गर्म जलधारा (Lupunghutu, Chaibasa: Where Water Flows From Tree-Root)
  7. हिरनी जलप्रपात और सारंडा के जंगलों में रमणीय झारखण्ड (Hirni Falls, Jharkhand)
  8. दशम जलप्रपात: झारखण्ड का एक सौंदर्य (Dassam Falls, Jharkhand)
  9. क्या था विश्वयुद्ध-II के साथ झारखण्ड का सम्बन्ध? (Jharkhand In World War II)
  10. जमशेदपुर में बाढ़ का एक अनोखा नमूना (Unforeseen Flood in Jamshedpur)
  11. नेतरहाट: छोटानागपुर की रानी (Netarhat: The Queen of Chhotanagpur)
  12. किरीबुरू: झारखण्ड में जहाँ स्वर्ग है बसता (Kiriburu: A Place Where Heaven Exists)

खत्म कर दिया और अभी वहाँ बसते हैं कुछ गिने चुने जानवर ही जैसे की हाथी और बन्दर। सुबह सुबह आठ-नौ बजे का वक्त था और दलमा की पथरीली पगडंडियों से हम गुजर रहे थे। दलमा समुद्र तल से करीब चौबीस सौ फीट की ऊंचाई पर है जहाँ चढ़ने में औसतन तीन से चार घंटे का वक़्त लगता है। जुलाई के महीने में भी गर्मी काफी तेज थी और सबके पसीने छूटने लगे। धीरे धीरे जंगलो का घनापन बढ़ता चला गया, अब कहीं धुप था तो कहीं छांव, और हम अब काफी ऊपर आ चुके थे। जंगलो के सन्नाटे को चीरने के लिए एक मोबाइल का गाना भी यहाँ काफी था। रास्ते में एक गणेश मंदिर पड़ता है जहाँ कुछ देर विश्राम करने के बाद पुनः हमारा कारवां आगे बढ़ा।
रास्ते भर हमलोगो ने रुक रुक कर बार बार नीचे की और देखा और इस मनमोहक छटा को कैमरों की नजर में कैद कर लिया। सुना था की चोटी पर चढ़ने के बाद वहां से पूरा जमशेदपुर दिखाई पड़ता है, उस दृश्य की कल्पना भी सभी के मन में छायी हुई थी और थकान के बावजूद सब इसी मकसद के साथ बढ़ रहे थे। अब मंजिल ज्यादा दूर नहीं था। चाय-पकोड़ों की दुकाने दिखने लगी और वन विभाग का भवन भी। अब सिर्फ अंतिम चोटी एक किमी पर ही थी। बस अब दुगुने जोश के साथ चहकते हुए हम निकल पड़े। कुछ बंदरों और लंगूरों का समूह हमें दिखाई पड़ा। यहाँ हाथियों का भी काफी आतंक रहता है पर हमें नसीब नहीं हुआ।
जैसे ही चोटी पे हम पहुचे बादलों का समूह हवा में हमारा स्वागत कर रहा था।
 वही स्थित एक शिव मंदिर में लोगो की भीड़ लगी थी। अब असली नजारा था वहां से नीचे का। पूरा जमशेदपुर एक छोटे से कस्बे के आकार में लग रहा था और बीचोंबीच स्वर्णरेखा नदी की एक पतली रेखा इसकी शोभा बढ़ा रही थी।
इस चित्र में जो एक चमकीली टेढ़ी-मेढ़ी रेखा दिखाई पड़ रही है, वही है स्वर्णरेखा नदी, यह नजारा सचमुच बहुत ही अद्भुत था। अब हमारा वक़्त हो चला था। कुछ देर तक इधर उधर मस्ती करने के बाद हमारे कदम वापस पहाड़ की ढलान की ओर चल पड़े।










दलमा चोटी से पुरे जमशेदपुर का नजारा 
इन्हें भी अवश्य पढ़ें 
एक सफर नदी की धाराओं संग (River Rafting In The Swarnarekha River, Jamshedpur) 

Post a Comment Blogger

 
Top