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साल 2015 कुछ ही दिनों में हमसे विदा लेने वाला है और जल्द ही इतिहास के पन्नों में गुम हो जायेगा। यात्रा का शौकीन तो मैं हमेशा से था ही, लेकिन इस वर्ष आखिर क्या ख़ास किया मैंने? ब्लॉग जगत में प्रवेश के साथ ही यात्रा का मजा दिन दूनी और रात चौगुनी गति से बढ़ता चला गया, साथ ही देशभर के यात्रा ब्लागरों के साथ बढ़ती घनिष्ट मित्रता दिन प्रति दिन और प्रगाढ़ होती चली गयी। इस वर्ष कुल छह यात्राओं में मैंने 20 दिन होटलों में और 8 दिन ट्रेन में गुजारे। तो पेश है इस वर्ष के यात्रानामा-2015 पर एक नजर-
2015


(1) शुरुआत हुई जनवरी महीने में
कोलकाता से-
सांस्कृतिक विरासत के धनी इस शहर का सफर काफी ज्ञानवर्धक रहा। लेकिन खेद है की अपरिहार्य कारणों से इसे मैंने अब तक तो नहीं, पर शीघ्र ही ब्लॉग की पृष्ठभूमि में रखूँगा।


(2 ) फिर जून में दक्षिण भारत की ओर रुख किया -कोयंबटूर होते हुए ऊटी की नीली पहाड़ियों कदम रखा, फिर    केरल के तिरुवनंतपुरम एवं कोवलम के समुद्रतटों से होते हुए अंतिम बिंदु कन्याकुमारी तक एवं अंत में आया बैंगलोर
लेकिन ये किस्सा भी अब तक पूरी तरह से ब्लॉग में रूपांतरित नहीं हो पाया है।
(3) अगस्त में अचानक एक दिन झारखण्ड की बरसाती छटा देखने को जी उत्सुक हो उठा और निकल पड़े सबसे ऊँची चोटी पारसनाथ की और। एक अनोखा और अछूता हिल स्टेशन। मगर इस पर भी लिखना अभी बाकी है।
2015
घुमक्कड़ी दिल से!
(4) अक्टूबर के महीने में सहकर्मियों संग हुई दुबारा मुंबई के जन-जीवन से रु-ब-रु कर देने वाली जीवंत और गोवा के मनोहारी तटों की खूबसूरत यात्रा।

(5) नवंबर के महीने में की कोलकाता होते हुए हुगली पार कर गंगासागर तक की रोमांचक यात्रा।

(6) वर्ष के आखिरी हफ्ते में भी इस जिज्ञासु प्राणी को शान्ति नहीं मिली और निकल पड़ा अपने ही राज्य में रांची के नजदीक स्थित झारखण्ड के अजूबे पतरातू घाटी की ओर। यह घाटी सचमुच आपको बड़े बड़े हिल स्टेशनों की याद दिला देगा जहाँ भविष्य में फिल्म सिटी बनाये जाने की भी योजना है। अब अगले वर्ष ही इसे ब्लॉग में परिणत कर पाउँगा।

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