अंडमान यात्रा: नील द्वीप पर पैदल भ्रमण- एक नीला एहसास (Neil Island- A Blue Heaven)

पोर्ट ब्लेयर से 36 किमी उत्तर-पूर्व दिशा में नील नामक एक छोटा सा द्वीप है, लेकिन 36 किमी की ये दूरी भी समुद्र में काफी अधिक महसूस होती है। पोर्ट ब्लेयर से नील के लिए रोजाना सुबह-शाम फेरियां चलती हैं, मैंने कोस्टल क्रूज में बुकिंग करवाई जिसकी टिकट छह सौ रूपये की थी। मैक्रूज सबसे उच्च श्रेणी और सबसे तेज जहाज माना जाता है जो नील में बिना रुके पोर्ट ब्लेयर से सीधे हैवलॉक के बीच चलता है। कोस्टल क्रूज भी मैक्रूज का ही है, पर ये नील होते हुए हेवलॉक जाता है।

अंडमान यात्रा का कार्यक्रम कैसे बनायें? (How to plan Andman Trip)

शुरुआत अंडमान यात्रा की… ( Trip to Andman: Jamshedpur-Kolkata to Port Blair)

अंडमान यात्रा: सेल्युलर जेल (Trip to Andman: Cellular Jail)

अंडमान यात्रा: लकड़ियों की जादूगरी- चाथम आरा मील और कोर्बिन तट (Chatham Saw Mill and Corbyn’s Cove Beach- Port Blair)

अंडमान यात्रा: नार्थ बे तट और भूतपूर्व पेरिस ऑफ़ ईस्ट- रॉस द्वीप (North Bay and Ross Island, Port Blair)

इन दोनों जहाजों की makruzz.com से बुकिंग घर बैठे कर सकते हैं। एक ग्रीन ओसन नाम का जहाज भी है जिसका वेबसाइट है greenoceancruise.com/ कभी कभी इनकी आधिकारिक वेबसाइट में पेमेंट की समस्या आने पर किसी एजेंट वेबसाइट का भी सहारा ले सकते हैं जैसे की trip.experienceandamans.com , मैंने भी इसी साइट से बुकिंग की थी। ध्यान रहे की सीधे जहाज के आधिकारिक वेबसाइट से बुक करने पर टिकट तुरंत मिल जाता है, पर एजेंट वेबसाइट से करने पर पहले आपको पेमेंट करना होगा, फिर कुछ घंटे बाद वे टिकट ईमेल कर देते हैं।  सरकारी फेरियों के बारे जैसा की मैंने पहले ही कहा है की उनकी बुकिंग सिर्फ जेट्टी काउंटर पर ही होती है। सरकारी फेरियों का टाइम-टेबल इस पोस्ट के अंत में दिया गया है, जबकि  फेरियों के बारे जानने के लिए उनके सम्बंधित वेबसाइट पर जा सकते हैं।

अंडमान यात्रा: नील द्वीप पर पैदल भ्रमण- एक नीला एहसास (Neil Island- A Blue Heaven)

नील से हेवलॉक- रंग-बिरंगा राधानगर तट (Neil to Havelock- The Colourful Radhanagar Beach)

चिड़ियाटापू और मुंडा पहाड़ तट: समंदर में पहाड़ों पर सूर्यास्त! (Chidiyatapu and Munda Pahad Beach: Sunset in the hilly ocean)

वंडूर तट और दुनिया के सबसे अच्छे कोरल रीफ वाला जॉली बॉय द्वीप (Wondoor Beach and Jolly Bouy Island: One of the best Coral Reefs of the World)

अंडमान ट्रंक रोड: समंदर से गुजरने वाले हाईवे पर सफर-पोर्ट ब्लेयर से डिगलीपुर (Andman Trunk Road: Highway which crosses the sea-Port Blair to Diglipur)

रॉस एंड स्मिथ- जुड़वाँ टापू पर दो समुद्र तटों का मिलन (Ross and Smith Twin Island- Meeting of two sea beaches)

रंगत की काली रात और सुबह बाराटांग में चूने पत्थर की सफ़ेद गुफाएं (Night stay at Rangat and Lime Stone Caves of Baratang)

How to Plan Andman Nicobar Trip

My 10 Days Itinerary for Andman Trip

Trip to Andman: The Cellular Jail

Neil Island- A Blue Heaven

The Neil Island, Andman

पोर्ट ब्लेयर के फिनिक्स बे जेट्टी से नील के लिए कोस्टल क्रूज की फेरी का प्रस्थान समय था सुबह साढ़े सात बजे और नील पर आगमन डेढ़ घंटे बाद सुबह आठ बजे। हवाई उड़ानों की तरह बोर्डिंग से एक घंटे पहले पहुंचना और एक आई डी प्रूफ अनिवार्य है। मार्च के अंतिम सीजन में भी पोर्ट ब्लेयर जेट्टी पर यात्रियों की भारी संख्या थी। सुरक्षा जांच और टिकट चेक इन यहाँ बिलकुल एअरपोर्ट जैसा ही है, लेकिन बाद में पता चला की नील और हेवलॉक के जेट्टी पर सुरक्षा जांच उतनी सख्त नहीं है। समय से काफी पहले पहुचने के कारण शायद मैं पहला यात्री था और अपने जहाज के इर्द-गिर्द घूम रहा था, अन्य फेरियों का समय हो चला था, वे प्रस्थान करने वाले थे।               सात बजे जहाज का एक स्टाफ आया और उसने सबके टिकट पर चेक इन का मुहर लगाना शुरू किया। धीरे-धीरे लोग आने लगे, लाइन में खड़े होकर बोर्डिंग भी शुरू हो गया। इतने बड़े पानी जहाज में सफ़र करने का ज़िन्दगी में यह पहला मौका था, लगभग ढाई सौ से भी अधिक यात्रियों के साथ, छोटे-मोटे नावों में तो अनगिनत बार चढ़ चूका हूँ।      

      जहाज अन्दर पुरी तरह से वातानुकूलित था, और सबसे मजे की बात मुझे बिन मांगे ही खिड़की वाली सीट मिली थी, मुझे इसका पता पहले न था। तय समय पर ही जहाज ने प्रस्थान करना शुरू किया। बायीं तरफ की खिड़की से पोर्ट ब्लेयर दूर जाता महसूस होने लगा। पहले तो ऐसा अनुमान था की बीच समुद्र में जब जहाज होगा तब चारों तरफ पानी का पूरा 360 डिग्री का नजारा मिलेगा, पर ऐसा हुआ नहीं। दूर के टापू हमेशा नजर आते ही रहे। अन्दर एक टीवी लगा था, जिसपर हवाई जहाज की भांति सुरक्षा जानकारी दी जा रही थी। अंडमान में छोटे नावों पर लाइफ जैकेट पहनना आजकल अनिवार्य कर दिया गया है, पर बड़े जहाजों में हर समय पहनने की जरुरत नहीं।    

              डेढ़ घंटे का यह सफ़र खिड़की से समुद्र को निहारते ही खत्म हो गया, और नील द्वीप पहुँचने की घोषणा हुई। जहाज से बाहर निकलते ही नील द्वीप पर समुद्र का जो स्वरुप मैंने देखा उसे शब्दों में बयां करना मेरे लिए असंभव है! कितने तरह के रंग दिख रहे थे कहना मुश्किल है- नीला, हल्का नीला, हरा, हल्का हरा, अद्भुत! बहुत सारे लोग यह कहते मिल जायेंगे की नील में कुछ नहीं है! वे सिर्फ हेवलॉक को ही जानते हैं! यह जरुर है की नील थोडा कम विकसित है, लेकिन सुन्दरता के मामले में कतई कम नही है।              

     नील द्वीप प्रवेश करने पर देखा की यहाँ एक छोटा सा ही बाजार है। नील आखिर बड़ा ही कितना है- मुश्किल से पांच किमी। एक ऑटो वाले से पूछा, “लक्षमणपुर चलोगे?” उसने तीन सौ रूपये मांगे! नक़्शे के अनुसार होटल ब्लू स्टोन जेट्टी से सिर्फ सात सौ मीटर ही दूर था। फिर दुसरे ऑटो ने सौ रूपये मांगे, मोल-तोल कर आख़िरकार वो सिर्फ पचास रूपये में ही मान गया। ये होटल वाले भी कितनी गलत जानकारियां साईट पर देते हैं, दो किमी की दूरी को सात सौ मीटर लिखते है! होटल पंहुचा तो घडी की सुइयां दिन के नौ बजा रही थी। गर्मी और उमस थी। नील में घुमने के लिए  बाइक (पांच-छह सौ रूपये) और साइकिल (दो-तीन सौ रूपये) किराये पर मिल जाते हैं। साथ ही बाइक या साइकिल लेने पर दो-ढाई हजार का सिक्यूरिटी डिपाजिट भी देना होगा। पर जब नील सिर्फ पांच किमी ही बड़ा है तो क्यों न इसे पैदल ही नापा जाय ? समय भी मेरे पास बहुत था- नील में पूरे के पूरे चौबीस घंटे थे।

               नील द्वीप पर सबसे अधिक प्रसिद्ध है- नेचुरल ब्रिज (Natural Bridge) या प्राकृतिक पूल। होटल से सिर्फ दो किमी पर था, और मैंने छोटे से बैग में पानी की दो बोतलें, टोपी, कैमरा-मोबाइल और सेल्फी स्टिक लेकर उधर ही पैदल कूच करना शुरू कर दिया- आराम से टहलते-टहलते। यह रास्ता उधर को ही जा रहा था, जिधर से मैं अभी-अभी ऑटो से आया था। आगे जाकर एक रास्ता बाजार या जेट्टी की ओर न जाकर दायें मुड़ नेचुरल ब्रिज की तरफ ले जाती है।  

                       मुख्य सड़क पर एक जगह बहुत सारी टूरिस्ट गाड़ियाँ खड़ी थी, समझ गया की यही से अन्दर नेचुरल ब्रिज होगा। कुछ दूर तक पैदल रास्ता था, निम्बू पानी वाले दुकान लगाये बैठे थे। तट दूर से दिखने लगा, पर ये क्या? तट पर तो कीचड़-ही-कीचड़ है! उसपर भी लोग किसी तरह चल रहे हैं। पास आकर पता चला की ये कीचड़ नहीं, बल्कि भूरे रंग के कोरल हैं। कोरल एक अचल सजीव प्राणी है जिसकी वृद्धि दस वर्षों में एक-दो इंच की ही होती है। मर जाने पर यही कोरल अनगिनत समुद्री जीवों के आश्रय भी बन जाते हैं। कोरल की ऐसी बेतहाशा उपस्थिति के कारण ही इसे कोरल पॉइंट भी कहा जाता है। शायद निम्न ज्वार का समय होने के कारण तट काफी दूर चला गया होगा और कोरल बाहर दिख रहे होंगे।                     सख्त कोरलों पर चलना काफी दुष्कर कार्य था। दस-पंद्रह मिनट इन पर चलने के बाद प्राकृतिक पूल दिखाई दे गया। यह कुछ और नहीं बल्कि प्राकृतिक रूप से पूल की शक्ल में बने चट्टान हैं। इस पूल से भी अधिक ख़ास यह तट है जो निम्न ज्वार के कारण कुछ देर के लिए अपनी अंदरूनी दुनिया दिखा रहा था। कोरलों के बीच बने गड्ढों में समुद्री जल बिलकुल पारदर्शक और उसमें तैरती रंग बिरंगी मछलियाँ! सर्पीले आकार में काले रंग के कुछ शर्मीले किस्म के जीव चट्टानों की दरारों और बालू में छुपे हुए थे, किसी ने बताया की ये स्टार फिश हैं।

कोरल तट देखने के बाद मैं वापस चला भरतपुर तट की ओर जो जेट्टी के बगल में ही है, जिसका दर्शन नील पर कदम रखते समय एक बार हो चुका था। यह तट नील का सबसे सुन्दर तट है और बैठने-लेटने की भी मुफ्त में व्यवस्था है। अभी भी निम्न ज्वार का ही समय था, इस कारण पानी बहुत दूर चला गया था। नीले तट को छूने के लिए मैंने बढ़ना शुरू किया, कुछ दूर तो श्वेत रंग में बालू ही बालू थे, पानी छिछला। खाली पैर चलना मजेदार था।  अचानक पैरों में तेज चुभन होने लगी, नुकीले कोरल आ गए। यहाँ तो कोरलों की भरमार थी! हर रंग के कोरल- भूरे, पीले, नीले। पर इन पर चल पाना उतना ही कठिन। फिर भी पर्यटक इनकी परवाह न करते हुए बिलकुल अंत तक गए जब तक फिर से बालू मिलना न शुरू हो गया। एक स्थान ऐसा आया जहाँ अचानक पानी कमर तक आ गया, और पैरों में चुभन भी खत्म हो गयी। नीले रंग के प्राकृतिक पारदर्शी स्विमिंग पूल में।

                   वापस आने तक गर्मी और उमस भरे मौसम के वजह से थकान सा महसूस होने लगा, तट पर ही कुछ देर बैठा रहा। यहाँ से जेट्टी भी दिख रहा था। भोजन का समय हो चला, अब जेट्टी के पास वाले बाजार की तरफ बढ़ना था। यहाँ सिर्फ गिने-चुने रेस्तरां थे कुछ चाइनीज फ़ूड वाले, कुछ दक्षिण भारतीय वाले। दक्षिण भारतीय रेस्तरां वाले से मैंने हल्की-फुल्की बातचीत की। उसने बताया की वे पिछले पचास सालों से तमिलनाडु से आकर यहाँ बसे हुए हैं। मैंने पूछा की इतने छोटे से जगह में मन लग जाता? उसने कहा की नहीं भी लगे तो क्या करें, यहीं के पैदाइशी हैं! पूरे अंडमान में इसी तरह तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि स्थानों से लोग आकर बसे हुए हैं, पर एक खास बात यह है की हिंदी सबकी सामान्य भाषा है, बाकि अपने घर की भाषा चाहे तमिल हो या बांग्ला! खान-पान और भाषा की दिक्कत अंडमान में अब तक कहीं न हुई, वैसे भी मुझे किसी भी शैली के खान-पान से कोई दिक्कत नहीं।

टापू के बिलकुल दूसरे छोर पर लक्ष्मणपुर तट है, और होटल भी उसी रोड पर था। लक्ष्मणपुर तट पर सूर्यास्त काफी अच्छा होता है, पर अभी काफी समय बाकि था। इसलिए सोचा की जरा होटल में कुछ देर आराम कर लूँ फिर शाम को सूर्यास्त देखने निकलूंगा। धीरे-धीरे चलना शुरू किया। नील की सड़कों पर जो कुछ भी बड़ी कारें दौड़ रहीं थी, सभी टूर पैकेज वाले ही थे। कुछ पर्यटक स्कूटी से घूम रहे थे, कुछ विदेशियों को मैंने साइकिल पर भी देखा। पर एक बात जो हर जगह भारत में आम है- सड़कों पर आवारा कुत्तों का होना! इतने छोटे से टापू पर भी हर जगह कुत्ते मौजूद थे, न जाने कैसे यहाँ तक आये होंगे। रात के अँधेरे में इनका झुण्ड में अंधाधुंध भौंकना बिलकुल देसी अनुभव दे गया, मुख्य भूमि से इतनी दूर होकर भी!

शाम के पांच बजे होटल से लक्ष्मणपुर तट की ओर चला। बीस मिनट बाद बिलकुल श्वेत रंग के एक तट पर नजर पड़ी। शाम होने वाला था, इस कारण धीरे-धीरे पर्यटक आने लगे थे। अंडमान में सूरज के उगने और डूबने का समय हमारे मुख्य भूमि से लगभग पैतालीस मिनट आगे है, इस कारण सब कुछ जल्दी होता है यहाँ। सूरज के लालिमा ग्रहण करते ही भीड़ काफी हो गयी, कैमरे सूर्य की ओर मुड़ गए। दुकानें लगने लगीं। सूर्य का अस्त होना सिर्फ पांच-दस मिनट का ही खेल था, अस्त होते ही सब वापसी करने लगे।

होटल के मुख्य से बाजार से जरा दूरी पर होने के कारण बार बार काफी पैदल चलना पड़ा, यह चीज अखर गयी, पर  सिर्फ एक दिन की ही तो बात थी! नील का नीला सफर अब यहीं खत्म, होता है, अगले पोस्ट में चलेंगे हेवलॉक की ओर !

Like Facebook Page: facebook.com/travelwithrd

Follow on Twitter: twitter.com/travelwithrd

Subscribe to my YouTube channel: YouTube.com/TravelWithRD.

email me at: travelwithrd@gmail.com