काठमांडू के नज़ारे- पशुपतिनाथ, बौद्धनाथ, भक्तपुर दरबार और नागरकोट- नेपाल भाग -2 (Kathmandu- Nepal Part-II)

पिछले पोस्ट में आपने देखा की जमशेदपुर से काफी जद्दोजहद कर हम काठमांडू तक पहुँच चुके थे। काठमांडू के प्रथम दर्शन से लगा की यह कोई बड़ा शहर ही है। हलकी हलकी बारिश के साथ मौसम बड़ा सुहावना था यहाँ। होटल हमारा पहले से बुक न था, इसीलिए हमने इधर उधर पता कर अंततः फ्री वाई-फाई से लैस होटल पशुपति दर्शन को ही दो दिनों के लिए चुना। 

    नेपाल प्रवेश करते ही हमलोगों ने कुछ पैसे नेपाली मुद्रा में बदली करवा लिए थे। नेपाल का एक रुपया भारत के साठ पैसे के बराबर होता है। लेकिन बाद में हमने पाया की मुद्रा बदलने की जरुरत उतनी न थी क्योंकि हर जगह भारतीय मुद्रा भी स्वीकार किये जा रहे थे। कोई भी सामान खरीदने पर दुकानदार NC यानि  नेपाली करेंसी और IC यानि इंडियन करेंसी में अलग अलग मूल्य बताया करते हैं।           

नेपाल जैसे छोटे से देश की राजधानी है काठमांडू, लेकिन यह आज हमारे दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों जैसा ही रूप धारण कर चूका है। सड़कों पर ढेर सारा ट्रैफिक है, पर मौसम बड़ा ही सुहावना है। काठमांडू शहर भ्रमण की शुरुआत में हम पशुपतिनाथ मंदिर की ओर बढे। बागमती नदी के किनारे बसा यह नेपाल का सबसे प्राचीन मंदिर है। मंदिर का स्वरुप पारंपरिक नेपाली पैगोडा शैली का ही बना हुआ लगता है, लकड़ी, ताम्बे और सोने-चांदी जैसी धातुओं का प्रयोग किया गया है। फ़ोटो लेना तो मना था फिर भी मुख्य द्वार का ले लिया, सुबह सुबह भीड़ भी ज्यादा न थी। अप्रैल 2015 के भूकंप में यह मंदिर सुरक्षित बच गया था। 

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              इसके बाद एक और है बौद्धनाथ स्तूप। यह नेपाल के सबसे बड़े स्तूपों में से एक है। कहा जाता है की गौतम बुद्ध की मृत्यु के तुरंत बाद ही इसका निर्माण किया गया था और इसकी स्थापत्य कला में तिब्बत की भी कुछ झलक मिलती है। यह काठमांडू के सबसे बड़े पर्यटन केन्द्रों में से एक है। गोलाकार संरचना के चारो तरफ से लोग चक्कर लगाते हुए देखे जा सकते हैं, साथ ही अनेक बौद्ध-भिक्षुओं का भी दर्शन कर सकते हैं। अप्रैल 2015 के महाभुकंप से यह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ, जिससे इसके गुम्बद का उपरी हिस्सा टूट गया था , पर फिर से कुछ ही महीनों में गुम्बद की दुबारा मरम्मत की गयी। पशुपतिनाथ और बौद्धनाथ दोनों ही UNESCO द्वारा विश्व विरासत घोषित किये गए हैं।

इसी तरह स्वयंभूनाथ भी प्रसिद्द स्तूप है, वैसे यहाँ और भी ढेर सारे बौद्ध और हिन्दू मंदिरों की लंबी फेहरिस्त है लेकिन सभी की बनावट करीब करीब एक जैसी ही है जिस कारण हमने वहाँ जाने की उतनी जिज्ञासा भी न हुई।               

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    इन मंदिरों और स्तूपों का दर्शन करते करते शाम घिर आई। रात हुई तो इस शहर का स्वभाव ही बदल गया। नाईट लाइफ के मामले में यह शहर कम नहीं है। हर गली-गली में डिस्को और बार खुले हुए हैं, यानि पश्चिमी सभ्यता की जड़ें यहाँ भी गहराई तक समायी हुई हैं। शाम होते ही शहर का एक हिस्सा भड़कीले संगीत और नशे में डूब जाता है। रात के ग्यारह बजे सारी दुकानें बंद कर दी जाती हैं, और हमारा पहला दिन यहीं ख़त्म होता है।      

अगले दिन हमने घुमने के लिए दो जगहों का चुनाव किया- भक्तपुर दरबार स्क्वायर तथा नागरकोट। काठमांडू से तेरह किलोमीटर दूर भक्तपुर नाम का एक शहर है, जिसपर यह दरबार स्थित है। यह भी यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित किया जा चूका है। दरबार चार भागों में विभाजित है- दरबार स्क्वायर ,तौमधि स्क्वायर, दत्तात्रय स्क्वायर, पॉटरी स्क्वायर – और समूचे का नाम भक्तपुर दरबार स्क्वायर है। पचपन खिडकियों वाला महल सबसे प्रमुख ईमारत है। यूँ तो इनमे और भी ढेर सारी इमारतें हैं जिनमे सोने से बने दरवाजे, सिंह दरवाजे, लघु पशुपतिनाथ मंदिर, बत्साला मंदिर, नयातापोला मंदिर, भैरवनाथ मंदिर, उग्रचंडी, उग्रभैरव, रामेश्वर मंदिर, गोपीनाथ मंदिर  और राजा भुपतिन्द्र की प्रतिमा।  काठमांडू घाटी का यह सबसे ज्यादा देखा जाने वाला जगह है। गौरतलब है की भक्तपुर नेपाल की सांकृतिक राजधानी है, और कभी यह 12वी से 15वी सदी तक यह पुरे नेपाल की राजधानी थी। अप्रैल 2015 के भूकंप में यह दरबार भी काफी नष्ट हुआ था।  

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       काठमांडू दरबार स्क्वायर तथा पाटन दरबार का भी यही स्वरुप है, सभी यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित हैं। किन्तु बारिश के वजह से भली-भाँती दर्शन नहीं हो पाया, फिर हम नागरकोट की तरफ बढ़ चले। यह काठमांडू से 32 किलोमीटर दूर है, भक्तपुर जिले में ही आता है। लगभग सात हजार फीट की ऊंचाई पर यह एक मनोरम हिल स्टेशन है। यहाँ से हिमालय के अनेक चोटियों के साथ ही माउंट एवेरेस्ट का भी सूर्योदय देखा जा सकता है। दिलचस्प है की नेपाल के अधिकांश पर्यटक स्थलों में फ्री वाई-फाई की सुविधा दी गयी है। एक नजर तस्वीरों पर –

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12 thoughts on “काठमांडू के नज़ारे- पशुपतिनाथ, बौद्धनाथ, भक्तपुर दरबार और नागरकोट- नेपाल भाग -2 (Kathmandu- Nepal Part-II)

  1. aap ki post ne hamari nepal yatra ki yadin taza kar di…..gali wala photo thamel ka hai ??? darbar square mein abhi bhi footpath market lagtha hai ? gift ke liye acchi wa sasthi chiz mil jathi hai wahan…mene gift ke liye kuch khukhri kharidi thi

  2. महेशजी, थामेल तो हम गए थे लेकिन काफी रात हो चुकी थी. कुछ फोटो हो सकते हैं. जी हाँ दरबार स्क्वायर में अभी भी फूटपाथ मार्किट लगता है .

  3. फोटो देखकर तबियत प्रसन्न हो गयी ! आरडी जी काठमांडू की सैर बौत ही सुन्दर चल रही है ! लेकिन गलियां देखकर लगता है व्यावसायिकता पूरी तरह से हावी है ! कोरियन भाषा सीखें का एक बोर्ड लगा है जो आकर्षित करता है , मुझे लैंग्वेज सीखने का शौक जो है !!

  4. धन्यवाद योगीजी! यह तो सच ही है की हर जगह व्यावसायिकता हावी है, और नेपाल भी इससे अछूता नहीं है. यह जानकर अच्छा लगा की आपको घुमक्कड़ी के साथ साथ भाषाओँ का शौक भी है!

  5. 2014 के दिसंबर माह में वहा गया था । अब तो भूकंप के बाद बहुत कुछ नष्ट हो गया होगा । भक्तपुर और दरवार स्क्वायर का क्या हाल है अभी । पशुपति नाथ मंदिर के ठीक पीछे श्मशान घाट है नदी के किनारे वो भी देखने लायक है ।शायद आपने भी देखा होगा ।
    wifi तो वहा छोटी बड़ी हर दुकान में मिल जाती थी ।जिसका हम इस्तमाल करने से नहीं चुकते थे । काठमांडू में की रात को रंगीन बनाने में वहा के कैसिनो को बहुत बड़ा हाथ है ।देश विदेश से लोग वहा सिर्फ कैसिनो खेलने ही पहुच जाते है ।
    पुरानी याद ताजा करदी आपने । फ़ोटो और लेख पढ़कर ऐसा लग रहा था की में वही पहुच गया ।

  6. जी किशन जी अभी काफी कुछ नष्ट हो चूका है, दरबार स्क्वायर और भक्तपुर भी. और हाँ काठमांडू की रातें वाकई में काफी रंगीन हुआ करती हैं.

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