देखा है कभी? एक पटरी पर चलने वाली अद्भुत ट्रेन ! (Mumbai Mono Rail)

क्या आपने सिर्फ एक ही पटरी पर चलने वाली अद्भुत ट्रेन कभी देखा है? चौंक गए? लेकिन यह सच है। अब तक हम रोजाना चलने वाले साधारण पैसेंजर ट्रेन, टॉय ट्रेन, मेट्रो ट्रेन आदि के बारे सुनते आये थे। इनमे टॉय ट्रेन पहाड़ों पर चलने तथा मेट्रो ट्रेन भूमिगत (कहीं कहीं भूमि पर भी) होकर चलने के लिए प्रसिद्द है। आजकल द्रुतगामी बुलेट ट्रेन की चर्चा भी जोरों पर है। लेकिन इन सबमें एक बात सामान्य है, और वो यह की ये सभी ट्रेने दो पटरियों पर ही चल सकती हैं। मोनो रेल एक ऐसी तकनीक से बनी है जो सिर्फ एक ही पटरी पर दौडती है और इसे खासकर बड़े-बड़े महानगरों के लिए ही विकसित किया गया है, जहाँ बड़े निर्माणों के लिए उपलब्ध जमीन की काफी कमी रहती है।

              अपने देश में फ़िलहाल मुंबई में ही

ऐसी ट्रेन की सुविधा है जिसे मुंबई मोनो रेल के नाम से जाना जाता है।
पिछले वर्ष अक्टूबर में मुंबई यात्रा के दौरान एक बार मोनो रेल चढ़ने की तीव्र इच्छा हुई। व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद हमने किसी तरह से इसके बारे सारी जानकारी जुटाई और इस अनोखे ट्रेन के दर्शन हेतु निकल पड़े। इन्टरनेट के माध्यम से जुटाई जानकारी के मुताबिक हमारी यात्रा चेम्बूर मोनो रेल स्टेशन से प्रारंभ हुई। चेम्बूर से वडाला डिपोट स्टेशन तक का किराया मात्र ग्यारह रूपये ही देना पड़ा। इस ट्रेन की गति तीव्र नहीं होती, लेकिन यह बिलकुल ही एक नया अनुभव रहा। ट्रेन में सिर्फ चार बोगियां ही होती है, लेकिन अभी ज्यादा भीड़-भाड़ नहीं होती क्योंकि यह अभी प्रायोगिक तौर पर ही शुरू की गयी है और अनेक मार्गों पर कार्य प्रगति पर है। 
                    ट्रेन के बड़े बड़े खिडकियों से मुंबई शहर का नजारा बड़ा ही रोमांचक होता है। सबसे आगे की बोगी से सीमेंट की बनी हुई ट्रेक या पटरी दिखाई पड़ती है, जिसपर ट्रेन दौड़ रही होती है। ट्रेन के ड्राईवर केबिन में हमने देखा की सिर्फ एक ही व्यक्ति ट्रेन का चालक और नियंत्रक था। लगभग बीस मिनट बाद ट्रेन वडाला डिपोट स्टेशन पर खड़ी हुई और पुनः चेम्बूर की ओर वापस रवाना हुई।
मोनो रेल की खास बात यह है की इसे स्थापित करने में 
ज्यादा जगह की जरुरत नहीं पड़ती। पटरियां सिर्फ पतले पतले स्तंभों पर टिकी रहती है, जिनके लिए रोड के डिवाइडर जितनी ही जगह की जरुरत पड़ती है। मेट्रो ट्रेनों की क्षमता ज्यादा होने के बाद भी मोनो रेल महानगरों की ट्रैफिक कम करने में ज्यादा कारगर साबित हो सकता है, कारण, मोनो रेल की लागत मेट्रो की तुलना में आधी तो है ही, साथ ही यह जगह भी कम घेरती है।  भविष्य में भारत के अन्य महानगरों जैसे की दिल्ली एवं बैंगलोर में भी इसे शुरू किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल तो आपको मुंबई ही आना पड़ेगा। मुंबई मोनो रेल के बारे अधिक जानकारी एवं नक़्शे कुछ अन्य वेबसाइटों से मैंने जुटाई है जिनका विवरण इस चित्र में दिया गया है –

MUMBAI MONO RAIL ROUTE MAP 

एक नजर इन तस्वीरों पर-

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14 thoughts on “देखा है कभी? एक पटरी पर चलने वाली अद्भुत ट्रेन ! (Mumbai Mono Rail)

  1. पढ़ा है पहले भी इसके बारे में लेकिन इतना विस्तृत नहीं पढ़ा और न ही इतने फोटो देखे ! बढ़िया यात्रा रही आपकी

  2. किशन जी यह ट्रेन फ़रवरी 2014 में शुरू हुई और फ़िलहाल इसका पहला स्टेशन चेम्बूर और आखिरी स्टेशन है वडाला डिपोट जैसा की पोस्ट में लिखा गया है। लेकिन इससे आगे अभी और भी नए स्टेशन बनने वाले हैं और कुछ शायद बन भी गए होंगे।
    फ़ोटो अच्छे लगे, आपका शुक्रिया।

  3. रोज कोलकाता की मेट्रो रेल में सफ़र करते ही है आज आपने
    मोनो रेल की घर बैठे ही सैर करा दी ।
    वैसे ये ट्रेन कब से चालु हुई ।
    इसका पहला और आखिरी स्टेशन कौन सा है ।
    मैप डाल कर आपने अच्छा किया ।हमारे कोलकाता मेट्रो में तो फ़ोटो खीचने न देते है ।
    फ़ोटो अच्छे है ।

  4. संजय जी, वैसे फ़ोटो खींचने की मनाही वाला सन्देश तो मैनें कहीं नहीं देखा था वहां, हो भी सकता है। और आपने ठीक ही कहा की खड़े होने के लिए ज्यादा जगह दिया गया है। धन्यवाद।

  5. बैठने से ज्यादा शायद खड़े होने वालो के लिए जगह है । छोटा सफ़र एक वजह हो सकती है । फोटो खींचने पर दिल्ली मेट्रो में तो जुर्माना है वहां पता नहीं 😉

    बढ़िया पोस्ट RD

  6. सचिन जी, यह अन्दर देखने में तो लगभग मेट्रो जैसी ही है, लेकिन उससे काफी हल्की-फुल्की भी है.
    धन्यवाद.

  7. देखने में दिल्ली मैट्रो जैसी ही लग रही है। अच्छी जानकारी मिली इस पोस्ट पर आकर।

  8. बढ़िया जानकारी Rd जी।
    अब तक मुम्बई लोकल और मुम्बई मैट्रो से ही वाकिफ थे।

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