बैंकाक से पटाया (Bangkok to Pattaya)

                      15 मार्च 2018: थाईलैंड की धरती पर आज हमारी ज़िंदगी का पहला कदम था और हम डॉन मुएंग एयरपोर्ट से वीजा ऑन अराइवल प्राप्त कर बाहर निकल रहे थे। वीजा प्राप्त करने में एक घंटे लाइन में लगना पड़ा, इसके बाद इमीग्रेशन काउंटर पर तो जरा भी भीड़ नहीं थी। उन्होंने सिर्फ वेबकेम से हमारा फोटो लिया और बाहर जाने दिया। कार्यक्रम के मुताबिक आज ही हमें पटाया प्रस्थान करना था जिसके लिए बैंकाक के मोर्चित बस स्टैंड या सेंट्रल बस स्टैंड से गाड़ी मिलती है। डॉन मुएंग एयरपोर्ट के गेट नम्बर 6 से बाहर निकलने पर हमनें स्थानीय थाई नागरिकों को लाइन में खड़े होकर बस का इंतज़ार करते पाया। बस में चढ़ने के लिए भी ऐसा अनुशासन! मोर्चित जाने के लिए हमें A1 नामक बस में चढ़ना था, एक A1 बस रुकी, झट से हम तीनों उसमें चढ़ गए।  

बस बिल्कुल वातानुकूलित और महिला कंडक्टर। हमनें उससे अंग्रेजी में बात करने की कोशिश की, “क्या यह बस मोर्चित जाएगी?” परंतु कमजोर और टूटी फूटी अंग्रेजी में उसने क्या कहा, कुछ समझ न आया। बस के अन्य यात्री भी सिर्फ थाई ही बोलने वाले थे, हमें समझ मे आ गया कि यहां भाषा की दिक्कत होने वाली है। एक-दो किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद उस महिला कन्डक्टर ने अंततः ‘नो मोर्चित’ (No Morchit) कहा, अगले बस स्टॉप पर हम उतर गए। इंटरनेट से प्राप्त जानकारी के अनुसार मोर्चित जाने के लिए हम A1 बस पर तो ठीक ही चढ़े थे, पर यहां तो मामला कुछ और ही निकला!                        

                  हम किसी स्कूल या कॉलेज के सामने खड़े थे और स्थानीय लोगों से रास्ता पूछने की कोशिश में लगे थे। यहां कुछ नवयुवकों से हमारी ठीक ठाक बातचीत हो पाई, क्योंकि वे विद्यार्थी होने के कारण ठीक-ठाक अंग्रेजी बोल पा रहे थे, फिर भी उच्चारण में बहुत गड़बड़ी थी, जो हमारी अंग्रेजी से बहुत अलग थी। किसी से फोन पर बात कर पूछना भी असंभव ही था, क्योंकि मोबाइल पर नेटवर्क नहीं और टूरिस्ट सिम भी हमने खरीदा नहीं था।            

      बैंकाक में एक परिचित के पास हमें मिलने जाना था, जिनसे हमारी बात एयरपोर्ट पर उपलब्ध फ्री वाई फाई के माध्यम से व्हाट्सएप्प पर हुई थी, और उन्होंने बैंकाक बस स्टैंड का फोटो भी भेजा था। अब हमने यही फोटो लोगों को दिखाना शुरू कर दिया, “ये जगह जाने के लिए कौन सी बस पकड़नी पड़ेगी?” हमारे साथी मुकेश ने फ़ेसबुक पर एक थाई से दोस्ती कर रखी थी और एयरपोर्ट पर ही उनसे कह दिया था कि हम जल्द ही मोर्चित बस स्टैंड पहुँच रहे हैं। परंतु अब दो घंटे बीत चुके थे, संदेह था कि क्या अब भी वो बस स्टैंड पर हमारी प्रतीक्षा कर रही होंगी?            

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       कोई कुछ कहता, कोई कुछ, बड़ी दुविधा थी। अंत में जिस बस नम्बर का सबसे अधिक लोगों ने सुझाव दिया, उसी में हम चढ़ गए, बल्कि तुरंत कन्डक्टर से पूछ कर निश्चिन्त भी हो गए कि अब यही बस पक्का मोर्चित ही जाएगी। इस प्रकार लगभग डेढ़-दो घंटे हमनें सही बस खोजने में ही गवां दिए।                      

      भले ही यह एक छोटा सा ही देश हो, लेकिन सड़कें एकदम लाजवाब हैं! एकदम चिकनी और सपाट! भारत की सड़कों से काफी बेहतर, हालांकि मैं अपने देश की बुराई नहीं कर रहा। व्यवस्थित एवम अनुशासित ट्रैफिक के कारण सड़कों पर जाम शायद ही कभी लगता हो, हॉर्न की आवाज भी कहीं सुनाई नहीं पड़ती। परंतु, एकदम छोटी-छोटी दूरियों पर लंबी-लंबी लाल सिग्नलों के कारण गाड़ियों की लाइन जरूर लग जाती है।        

       लगभग आधे घंटे में हम मोर्चित आ गए, कुछ दूर पैदल चलने पर बहुत सारी बसों की कतार दिखाई पड़ी, यही था वो बस स्टैंड जहां से हमें पटाया की बस पकड़नी थी। मुकेश अपने फ़ेसबुकिया मित्र को ढूंढने चल गया, बाकी हम दोनों थाईलैंड में हर दो कदम पर मिलने वाले सेवन इलेवन (7 Eleven) नामक सुपर मार्केट की तरफ बढ़ चले। सेवन इलेवन एक बहुत बड़ा सुपर मार्केट चेन है, जो पश्चिमी देशों में लोकप्रिय होने के बाद थाईलैंड, मलेशिया जैसे देशों में भी काफी पांव पसार चुका है। यहां खाने पीने की चीजें जैसे ब्रेड, बिस्किट, केक से लेकर लगभग हर घरेलू जरूरत की चीजें मिल जाती हैं जैसे भारत मे रिलायंस फ्रेश या बिग बाजार का प्रचलन चल रहा है। यहां टूरिस्ट सिम कार्ड छः सौ रुपये में उपलब्ध था जिसमें एक हफ्ते की वैधता, चालीस मिनट फ्री इंडिया कालिंग और अनलिमिटेड इंटरनेट की सुविधा थी, लेकिन होटल में तो फ्री वाई फाई मिल ही जायेगा, ये सोचकर उस समय हमने सिम नहीं खरीदा।      

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                   उधर मुकेश ने अपनी मित्र को किसी तरह ढूंढ ही निकाला, सभी इकठ्ठे हुए। वह हमारे लिए एक बड़े से पॉलिथीन में ढेर सारे पेस्ट्री आइटम ले आयी थी। बहुत खुश थी वो, हम भारतीयों के साथ, टूटी फूटी अंग्रेजी बोल रही थी, बातचीत में समस्या के बावजूद। बहुत सारे शब्द और वाक्य ऐसे थे जो कभी हमारे माथे के ऊपर से गुजरे, कभी उसके माथे से, ऐसे में सिर्फ हँसना और मुस्कुराना ही संवाद बन जाता था। खैर, पटाया जाने वाली बस के बारे उसने बताया, काउंटर की ओर हमें ले गयी। बहुत सारे शब्द और वाक्य ऐसे थे जो कभी हमारे माथे के ऊपर से गुजरे, कभी उसके माथे से, ऐसे में सिर्फ हँसना और मुस्कुराना ही संवाद बन जाता था। खैर, पटाया जाने वाली बस के बारे उसने बताया, काउंटर की ओर हमें ले गयी। पता चला कि साढ़े दस बजे वाली बस की सीटें फुल हो चुकी हैं, साढ़े ग्यारह बजे वाली बस का टिकट मिला, भाड़ा 117 बहत यानी करीब 234 रु।                    

       हमारे पास एक घंटा और समय था। भाषाई दिक्कत के कारण हम उससे थाईलैंड के बारे ज्यादा कुछ नहीं जान सके, जिसका हमें अफसोस है, फिर भी मिलनसार स्वभाव ने हमें बहुत प्रभावित किया। वो बैंकाक के किसी हॉस्पिटल में एक मामूली नर्स ही थी, लाख अनुरोध के बावजूद हेल्थ का हवाला देते हुए उसने कोई भी चीज न खाई।          

                बस का समय हो चला, हम सबने एक साथ मोबाइल से एक वीडियो शूट किया, पर गलती से डिलीट भी हो गया जिसका मुझे बेहद अफ़सोस रहेगा। बिलकुल ठीक समय पर बस चल पड़ी। मर्सिडीज कंपनी की बस थी, आरामदायक और पूर्णतः वातानुकूलित। वैसे बैंकाक से पटाया ट्रेन द्वारा भी जाया जा सकता है, जिसके लिए बैंकाक के एक्कामाई नामक स्टेशन से ट्रेन मिलती है। कल रात भर की थकान थी, जिस कारण बस में न जाने कब नींद आ गयी, कुछ पता ही न चल पाया। सड़क भी अच्छी होने के कारण एक सौ चालीस किमी की यह दूरी सिर्फ सवा दो घंटे में ही तय हो गयी।                    

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       पटाया बस स्टैंड पर भीड़-भाड़ अधिक नहीं थी, पर भारतीय पर्यटक काफी संख्या में थे। हमारा होटल ज़िंग गूगल मैप के मुताबिक दस किमी दूर था। थाईलैंड में चार पहिये वाले ऑटो-रिक्शे को टुकटुक कहा जाता है, जिसकी बनावट भारतीय टेम्पो से कुछ अलग थी। टुकटुक वाले ने होटल तक पहुँचाने के पचास बहत यानि सौ रूपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से लिए। बाद में पता चला की होटल सिर्फ दस किमी नहीं, बल्कि तीस-चालीस किमी दूर जरूर रहा होगा, जिसके लिए ऑटो वाले ने इतने पैसे लिए। इस रास्ते पटाया का समुद्र तट भी नजर आया, और किनारे-किनारे ऊँची-ऊँची इमारतें।

हमने होटल मुख्य शहर से जरा बाहर का चुन लिया था, लेकिन makemytrip की वेबसाइट यह शहर के नजदीक ही बता रहा था ! भले ही होटल दूर रहा हो, पर अच्छा था। पर एक चीज जो तुरंत मन में खटकी- बाहर लिखा था- सिर्फ आठ सौ पचास बहत में यानि सत्रह सौ रु में कमरा उपलब्ध है! हमने तो दो हजार रु में इसे बुक किया था, पहली बार ऑनलाइन बुकिंग में ऐसा अनुभव हुआ। पीने के पानी की थाईलैंड में हर जगह किल्लत है, जिस कारण हमें सिर्फ 200ml के दो बोतल कम्लीमेंट्री तौर पर दिए गए। इसमें भला तीन लोगों का गुजारा कैसे होगा? बाथरूम में एक चीज यह देखने मिली की भारतीय होटलों की भांति यहाँ बाल्टी और मग नहीं होता, सिर्फ एक टेलीफोन शावर होता है, बाद में मलेशिया में भी यही व्यवस्था मिली। थाईलैंड में हॉस्टल का भी काफी प्रचलन है, अकेले घुमक्क्ड के लिए वही अच्छा है, सुबह का नाश्ता भी मुफ्त, लेकिन तीन होने के कारण हमने होटल ही चुना था। थकान के कारण शाम तक हम सोये रहे, शाम को शहर दर्शन के लिए निकले जिसके बारे अगली पोस्ट में बताऊंगा।

Phi Phi Island & Maya Bay Speedboat Tour
http://bit.ly/2K7RvSi

Pattaya City & Coral Island Day Tour from Bangkok
http://bit.ly/2MhRUEx

Bangkok Grand Palace and River Cruise Sightseeing Day Tour
http://bit.ly/2VWQZc8

Book Chao Faraya River Cruise Bangkok
http://bit.ly/2wttzAF

Cheapest Bangkok Safari World Ticket
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Bangkok Floating Market Tour
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16 thoughts on “बैंकाक से पटाया (Bangkok to Pattaya)

  1. इंफोर्मेटिव ब्लॉग सर���� 2 जगह चूक कर दी एक तो बस पकड़ने में दूसरा होटल की लोकेशन में �� जारी रखिये आनंद आने वाला है,

  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (11-05-2018) को "वर्णों की यायावरी" (चर्चा अंक-2967) पर भी होगी।

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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