भारत की सांस्कृतिक राजधानी की एक झलक (Glimpses of the City of Joy: Kolkata)

कोलकाता यानि की भारत की भूतपूर्व राजधानी और वर्त्तमान में जिसे सांस्कृतिक राजधानी का भी दर्जा दिया जाता है, कला-साहित्य के क्षेत्र मे भी बिलकुल अव्वल और अनेक ऐतिहासिक घटनाओ का गवाह रहा है। आईये इसकी कुछ झलकों से रू-ब-रू होते हैं।

 जिस चीज से इस शहर की पहचान होती है वो है सुप्रसिद्ध हावड़ा ब्रिज या रविन्द्र सेतु। अंग्रेजो के ज़माने में बिना नट-बोल्ट का बना हुगली नदी के ऊपर लटकता हुआ यह कोलकाता का प्रवेश द्वार ही है, जिसपर किसी की भी पहली नजर पड़ते ही दंग रह जाना लाजिमी है। रोजाना लाखों वाहनों को ढोता हुआ यह इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है। सबसे दिलचस्प तथ्य यह है की यहाँ तक पहुँचने के लिए किसी से पूछने की शायद ही कोई जरुरत पड़ेगी।

     ऐतिहासिक स्थलों की फेहरिस्त में अगला नाम आता है विक्टोरिया मेमोरियल का। संगमरमर से बना यह एक भव्य ईमारत है जिसे ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की याद में बनवाया गया था। यहाँ प्रवेश के लिए टिकट का प्रबंध है। महल के अंदर एक ऊँची सी विक्टोरिया की प्रतिमा खड़ी है,और साथ ही इस महल के कमरों को वर्त्तमान में संग्रहालय का रूप दे दिया गया है, लेकिन फोटो लेना प्रतिबंधित है। बाहरी परिसर हरे-भरे बगीचों से भरा है, अधिकांश लोग वही वक़्त गुजारते हुए देखे जा सकते हैं।

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कोलकाता दर्शन का अगला पड़ाव होगा एम पी बिड़ला तारामंडल। बिड़ला प्लेनेटोरियम या तारामंडल गुम्बद आकार का एशिया सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एक बहुत ही आश्चर्यजनक तारामंडल है जिसके अंदर जाकर आप दिन के दोपहर में भी एक कृत्रिम आसमान में उदघोषक की सहायता से  ग्रहो और तारों की स्थिति समझ सकते हैं। रोजाना आधे आधे घंटे के अनेक शो चलते है, और वो भी अलग अलग भाषाओँ यानि हिंदी, अंग्रेजी और बांग्ला में। साइंस सिटी आधुनिक कोलकाता को और समृद्ध करता हुआ 1997 में बनाया गया था जहाँ विज्ञान से जुड़ी अनेक तथ्यों को रोचक ढंग से दर्शाने के लिए मॉडल बनाये गए हैं। खासकर बच्चों के लिए यह बहुत ही मजेदार है। वैसे दिनभर घूमने पर भी सारे मॉडलों को देख पाना मुश्किल सा प्रतीत होता है।   

 कोलकाता दर्शन के अगले चरण में मैं आपको ले जा रहा हूँ हुगली नदी के कुछ घाटों की तरफ जिनमें दक्षिणेश्वर मंदिर एवं बेलूर मठ स्थित हैं। दोनों के बीच का सफर नाव से आसानी से तय किया जा सकता है। दक्षिणेश्वर एक काली मंदिर हैं जिसे रानी रासमणि द्वारा सन 1855 में बनवाया गया था। मंदिर के सीढ़ियों को छूती हुई कुछ इस तरह से हुगली निकल जाती है। इस मंदिर के दर्शन हेतु लगभग एक किमी पहले से ही पैदल चलना पड़ेगा अगर आप रोड मार्ग से आते हैं। यहाँ से सीधे बेलूर मठ  यानि की स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित रामकृष्ण परमहंस मिशन के मुख्यालय के लिए मैंने नाव पकड़ा। लगभग बीस-पच्चीस मिनट तक विशाल हुगली नदी को पार करना काफी रोमांचक था। फोटो लेने की मनाही होने के कारण यहाँ के दृश्य मैं नहीं दिखा पा रहा हूँ।

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                  मान लीजिये की बीच सड़क में अचानक आपको ट्रेन दिख जाय तो आप क्या करेंगे? जी हाँ देश का एक मात्र ट्राम सेवा कोलकाता में ही है और वर्त्तमान में इसे घाटे में ही मात्र विरासत बरक़रार रखने के लिए चलाया जा रहा है। एस्पलेनैड से श्यामबाज़ार तक एक तीस साल पुरानी ट्राम के कोच में बैठना सचमुच अनूठा था और यहाँ तो कंडक्टर खुद ही टूरिस्ट गाइड बन बैठा था। दिखने में ट्रेन जैसी लेकिन चलती थी बस जैसी! शहर को समझने में ट्राम सेवा बहुत काम आयगी, बिलकुल सस्ती और आसान सवारी, इसलिए जब भी कोलकाता आयें, एक बार ट्राम जरूर आजमाएं।

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        बहुचर्चित ईडन गार्डन्स स्टेडियम का चर्चा करना भी जरुरी समझूंगा ही क्योकि यह देश का सबसे बड़ा स्टेडियम है। दिन के समय जब मैं वहां गया तो उस समय रणजी मैच चल रहा था रेलवे और बंगाल टीम के बीच। दुनिया के सबसे प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों में इसका नाम आता हैं जो चारो ओर से बगीचों से घेरा हुआ है।


आईये देखतें हैं कोलकाता की कुछ तस्वीरें-हावड़ा ब्रिज का निचला  हिस्सा 

 हुगली नदी पर नाव 

बेलूर मठ का प्रवेश द्वार 

 विवेकानंद सेतु 

 दक्षिणेश्वर मंदिर 

 बिडला मंदिर 

 इडेन गार्डन स्टेडियम 

कोलकाता का प्रसिद्द ट्राम 

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