मिशन लद्दाख-1: तैयारियाँ (Preparing for Mission Ladakh)

          लद्दाख यानि हिमालय के पार की धरती! बंजर पहाड़ों से घिरा हुआ भारतवर्ष का एक दुर्गम इलाका, जिसका भौगोलिक स्वरुप देश के अन्य भूभागों से काफी अलग है। मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोग अक्सर गर्मियों में हरे-भरे-बर्फीले हिल स्टेशनों जैसे की मनाली, शिमला, दार्जिलिंग जैसे स्थानों की ओर रुख कर लेते है,
हिमालय के ये इलाके सदा हरे-भरे होते हैं। वहीँ दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर राज्य के पूर्वी भाग स्थित यह लद्दाख बिल्कुल अलग नजारा प्रस्तुत करता है, जहाँ बारिश शायद ही कभी होती होगी, पेड़-पौधों के बदले सिर्फ नंगे-भूरे पहाड़। सिर्फ यही नहीं, साल के कुछ महीनों को छोड़ बाकि समय बर्फीले मार्ग में आवागमन बंद रहने के कारण लद्दाख देश के बाकि हिस्सों से कट जाता है, ऐसे में साल के बाकि महीनों में सिर्फ वायु मार्ग से ही लद्दाख जाया जा सकता है। भौगोलिक विशेषताओं के अलावा लद्दाखी जन-जीवन भी देश के बाकि हिस्सों से कुछ अलग होता है। देश के इस सुदूर इलाके में जीवन यापन के तौर तरीकों को जानना हर सच्चे घुमक्कड़ की चाहत होती है।

Ladakh
लद्दाख: संसार का छत
  1. मिशन लद्दाख-1: तैयारियाँ (Preparing for Mission Ladakh)
  2. मिशन लद्दाख-2: दिल्ली से मनाली  (Mission Ladakh: Delhi to Manali)
  3. मिशन लद्दाख-3: मनाली में बाइक का परमिट (Mission Ladakh: Obtaining Bike Permit in Manali)
  4. मिशन लद्दाख-4: मनाली से भरतपुर (Mission Ladakh: Manali to Leh via Rohtang Pass-Keylong-Jispa-Darcha-Zingzingbar-Baralachala-Bharatpur) 
  5. मिशन लद्दाख-5: भरतपुर से लेह (Mission Ladakh: Bharatpur-Sarchu-Nakeela-Biskynala-Lachungla-Pang-Debring-Tanglangla-Upshi-Leh
  6. मिशन लद्दाख-6: शे गुम्पा, लेह महल, शांति स्तूप और हॉल ऑफ़ फेम (Mission Ladakh: Leh Palace and Hall of Fame)
  7. मिशन लद्दाख-7: मैग्नेटिक हिल का रहस्य और सिंधु-जांस्कर संगम (The Mysterious Magnetic Hill & Sindhu-Janskar Confluence)
  8. मिशन लद्दाख-8: रेंचो स्कूल (Mission Ladakh-8: Rancho School)
  9. मिशन लद्दाख-9: चांगला से पेंगोंग (Chang La to Pangong Tso)
  10. मिशन लद्दाख-10: पेंगोंग से नुब्रा और खारदुंगला (Pangong to Nubra and Khardungla)         

लद्दाख की इसी विशेषता के कारण काफी अरसे से यह मेरी चिर-प्रतीक्षित यात्रा सूची में था। किन्तु जब मैंने वहां जाने के साधनों के बारे पता लगाया तो पता चला की वहां यूँ ही चले जाना कोई आसान सा काम नहीं है, जैसा की हम अक्सर बस या ट्रेन पकड़ कर कहीं भी घूम आते हैं। वैसे तो दिल्ली से लेह के लिए रोजाना हवाई सेवा उपलब्ध है, लेकिन अगर आपने आठ-दस महीने पहले ही बुकिंग नही कराई तो, जुलाई-अगस्त के महीने में इसका किराया भी चरम पर होता है। 


               सड़क मार्ग से लेह जाने के लिए दो रास्ते हैं- एक जम्मू-श्रीनगर-कारगिल होते हुए, दूसरा मनाली होते हुए। अधिकतर लोग मनाली होते हुए जाते हैं और श्रीनगर होते हुए वापसी करते हैं। सड़क मार्ग से लद्दाख जाना काफी दुर्गम तो है, लेकिन बिना इसके आप लद्दाखी धरती का सही मजा नही उठा सकते। हवाई मार्ग से जाने पर आप दिल्ली से लेह मात्र एक घंटे में ही पहुँच जायेंगे, लेकिन रास्तों के रोमांच से वंचित ही रहेंगे। 
                         मनाली से लेह जाने के लिए रोहतांग पास के खुलने का इंतज़ार करना पड़ता है, जो की अक्सर मई-जून के महीने में खुलता है और सितम्बर के मध्य तक खुला रहता है। इसीलिए सिर्फ इन तीन-चार महीनों में ही सड़क मार्ग से लद्दाख जा पाना संभव है। वहीँ दूसरी ओर अगर आप श्रीनगर होकर जाना चाहते हों तो जोजिला पास के खुलने का इंतज़ार करना होगा। दिल्ली से मनाली होते हुए लेह के लिए बस सेवाएं भी इसी समय शुरू हो जाती है। हिमाचल पर्यटन द्वारा संचालित मनाली-लेह वाली बसों से आप लेह तक जा तो सकते हैं लेकिन इन बसों के चलने का कार्यक्रम रास्ता खुलने के बाद ही जारी किया जाता है और सभी बसें रोजाना नहीं भी चलती है। इन्हीं कारणों से मैंने बस से जाने का विचार त्याग दिया था।

                             पिछले एक दशक से लद्दाख जाने वालों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है, और जिनमें बाइक से जाने वाले अत्यधिक संख्या में हैं। अपने ढेर सारे घुमक्कड़ मित्रों ने भी बाइक से लद्दाख की रोमांचक यात्रा की है। वैसे मैं भी कोई बहुत बड़ा बाइकर नहीं हूँ, लेकिन एक बार बाइक से लद्दाख जाने की दिल से इच्छा जरूर थी। लेकिन जमशेदपुर से सीधे निकल जाना कोई आसान काम न था। अप्रैल के महीने से ही मैं योजना बना रहा था, हवाई मार्ग से जाना न था, बस सुविधाजनक नही लग रही थी, एक और तरीका था- दिल्ली से मनाली तक बस से तो आसानी से पहुंचा जा सकता था, फिर मनाली से लेह तक बाइक किराये पर ली जा सकती थी। लेकिन जब मैंने बाइक के किराये का पता लगाया तब लद्दाख जाने का सपना ही कुछ धूमिल सा हो गया, किराया दो से ढाई हजार प्रतिदिन था, और कम से कम आठ दिन तो लगने ही थे, मतलब पंद्रह-बीस हजार सिर्फ बाइक का किराया, पेट्रोल अलग, यह तो बिलकुल भी किफायती न था क्योंकि हम काफी बजट में चलने वाले हैं।
                    वैसे शुरुआत में लद्दाख जाने के बारे ब्लॉगर व् घुमक्कड़ मनु प्रकाश त्यागी जी से मेरी बात हुई थी, अपनी डिस्कवर बाइक से जाने वाले थे दिल्ली से, लेकिन उनके साथ पहले ही एक अन्य घुमक्कड़ मित्र प्रकाश मिश्र जी की बात हो चुकी थी। फिर कार से भी जाने के बारे सोचा लेकिन मनुजी ने बताया की उनकी कार छोटी है और अगर किराये पर कार लिए तो दिल्ली-लेह-दिल्ली का किराया करीब पचास हजार रूपये आएगा, इसीलिए यह योजना भी ख़त्म हो गयी। 
                 इसी बीच एक दिन मेरे एक मित्र कमल कृष्ण बेज जो की जमशेदपुर रोड़ मेल्टर्स क्लब के सदस्य हैं, ने अचानक मुझे बताया कि उनके बुलेट वाले ग्रुप का जुलाई में बाइक से लद्दाख जाने का कार्यक्रम बन चुका है जिसमें पहले से ही पांच-छह लोग हैं। मेरी तो बांछे खिल गयीं, तुरंत राजी हो गया।  कार्यक्रम कुछ यूँ था कि हमें ट्रेन से दिल्ली तक जाना था, फिर दिल्ली से मनाली होते हुए लेह तक। वापसी का मार्ग तय नही था। बाइक भी ट्रेन में ही पार्सल कर दिल्ली तक ले जाना था। ग्रुप के जाने वाले तीन सदस्य पहले से ही 22 जुलाई को भुवनेश्वर राजधानी ट्रेन में सीट आरक्षित करवा चुके थे, मैंने भी झटपट उसी ट्रेन में टिकट ले लिया। कमल अपने एक अन्य साथी के साथ सीधे जमशेदपुर से ही 21 जुलाई को निकलने वाला था। ट्रेन में सिर्फ दो बाइक ही पार्सल करनी थी। इनके अलावा चार अन्य साथी गुडगाँव से भी जुड़ने वाले थे, जो अपनी दो कारें निकालने वाले थे। इस प्रकार दस लोगों का जाना तय हो चुका था। अब बस तीन महीने तक इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करना बाकी था। 
                   अब कमल से अक्सर लद्दाख यात्रा की बातें होने लगी, क्या क्या ले जाना है, क्या क्या खरीदना है, इसकी एक लम्बी सी सूची ही मानो बन गयी। एक मिशन लद्दाख नाम का व्हात्सएप्प ग्रुप भी बन गया, वैसे ये ग्रुप कमल ने तीन साल पहले से ही बना रखा था। रोज उसमें ढेर सारे आईडिया आते। बहुत मजा आता। जैसे-जैसे दिन गुजरता गया, ग्रुप में जाने वाले कुछ नए लोग भी आये, कुछ पुराने लोगों का कार्यक्रम रद्द भी हुआ। 
                लद्दाख जाने के लिए वैसे तो कुछ साथियों ने बड़ी भारी भरकम तैयारियाँ कर ली, पर मैंने मोटे तौर पर सिर्फ एक बड़ा सा हाईकिंग बैग जिसे रकसक भी कहा जाता है, का जुगाड़ किया, कुछ टी-शर्ट ख़रीदे, कुछ जींस। यात्रा से लगभग एक महीने पहले तक रोजाना कुछ न कुछ बाजार से छोटी-मोटी चीजें खरीदना होता, ऐसा लगता जैसे की किसी शादी की तैयारी कर रहे हों। हाँ, गरम कपड़े ले जाना बहुत जरुरी था, और इधर गर्मी के मौसम में बड़ी मुश्किल से ही एक दुकान में ये मिले।

बाइक से जाने के लिए कुछ आवश्यक चीजों की सूची इस प्रकार है-
१. रेन कोट २. राइडिंग जैकेट व दस्ताने ३. हेलमेट ४. नी गार्ड (Knee Guards) ४. बाइक टूल किट ५. लगेज बाँधने के लिए बंजी कार्ड्स ६. जीपीएस यन्त्र  अगर हो तो ७. पॉवर बैंक ८. गॉगल्स ९. पानी बोतल १०. उपयोगी दवाईयां जैसे डायमोक्स आदि। इनके अलावा वे सभी चीजें जो आप एक आम सफ़र में ले जाते हैं। 
               वैसे बीहड़ रास्तों में रात गुजारने के लिए जगह जगह टेंट मिल जाते हैं, इसीलिए हम टेंट तो नहीं ले गए थे। और एक बात, मनाली से जाने पर बाइक की परमिट लेनी पड़ती है जो मनाली में ही जारी की जाती है, इसके लिए बाइक के सभी कागजात जैसे की ओनर पेपर, ड्राइविंग लाइसेंस, प्रदुषण प्रमाण पत्र एवं एक भारतीय पहचान पत्र- ये सब होने चाहिए। मनाली से लेह के बीच पेट्रोल पंप भी बहुत कम संख्या में है, इसीलिए अतिरिक्त पेट्रोल रखने के लिए एक-दो गैलन भी रख लेने चाहिए। लगेज बाँधने के लिए बाइक के पीछे आजकल एक कैरियर लगवाया जाता है जिसे लद्दाख कैरियर भी कहा जाता है, आप चाहे तो इसे भी लगवा सकते हैं।  
              इस प्रकार मेरा लगेज लगभग दस-ग्यारह किलो का ही था, जो की बहुत भारी तो नहीं कहा जा सकता। इस प्रकार जैसे जैसे 22 जुलाई करीब आता गया, उत्साह बढ़ता गया, आख़िरकार वो दिन आ ही गया, जिस दिन मुझे टाटानगर स्टेशन से दोपहर पौने चार बजे ट्रेन पकड़ दिल्ली के लिए रवाना होना था, यह था लद्दाख अभियान का पहला पड़ाव।
लद्दाख सीरीज के अन्य पोस्ट-

  1. मिशन लद्दाख-1: तैयारियाँ (Preparing for Mission Ladakh)
  2. मिशन लद्दाख-2: दिल्ली से मनाली  (Mission Ladakh: Delhi to Manali)
  3. मिशन लद्दाख-3: मनाली में बाइक का परमिट (Mission Ladakh: Obtaining Bike Permit in Manali)
  4. मिशन लद्दाख-4: मनाली से भरतपुर (Mission Ladakh: Manali to Leh via Rohtang Pass-Keylong-Jispa-Darcha-Zingzingbar-Baralachala-Bharatpur) 
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  6. मिशन लद्दाख-6: शे गुम्पा, लेह महल, शांति स्तूप और हॉल ऑफ़ फेम (Mission Ladakh: Leh Palace and Hall of Fame)
  7. मिशन लद्दाख-7: मैग्नेटिक हिल का रहस्य और सिंधु-जांस्कर संगम (The Mysterious Magnetic Hill & Sindhu-Janskar Confluence)
  8. मिशन लद्दाख-8: रेंचो स्कूल (Mission Ladakh-8: Rancho School)

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44 thoughts on “मिशन लद्दाख-1: तैयारियाँ (Preparing for Mission Ladakh)

  1. अगर श्रीनगर-कारगिल-लेह-मनाली रुट जाना हो तो बाइक का पास कहा पर बनेगा? क्या पास की जरूरत पड़ेगी? क्या हम जा सकते हैं?
    Plese suggest..

  2. बाइक राइडिंग हमेशा से एक स्वतंत्रता का आहसास कराती है / इस तरह की सुविधा गोवा में भी है वहाँ बाइक मात्र 200 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से मिल जाती है / मैं भी 25 – 30 अप्रैल 2018 के बीच में laddhak का प्लानिंग कर रहा हूँ लेकिन मन में बहुत सी शंकाएँ थी जो आपके पोस्ट से काफी हद तक कम हो गई धन्यवाद

  3. किसी प्रकार की पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं है। लेह में लोकल बसें चलती है, लेकिन हर रूट पर जाने का अलग अलग दिन तय होता है। बेहतर होगा आप कोई टैक्सी कर लें एक दिन के लिए। या फिर बाइक ले सकते हैं।

  4. इतने शीघ्र उत्तर की आशा नहीं थी। आपका आभार। मैंने चंडीगढ़ से मनाली की बस तो देख ली हैं। लेकिन मनाली से लेह की बस नहीं मिल रही। खैर मनाली पहुंच कर देख लेंगे।
    कृपया ये भी बताएं कि लेह में घूमने के लिए क्या साधन मिलेगा? किसी प्रकार की पूर्व अनुमति लेनी होगी? हमारा बजट 10000 तक ही होगा।

  5. विक्की बाबू, दिल्ली से लेह की बस तो चलती हैं, पर वे बीच से सवारी नहीं लेती। आप एक काम कर सकते हैं। चंडीगढ़ से पहले मनाली चले जाएं, वहां से लेह की बस जरूर मिल जाएगी। एक बार पता कर लें।
    लेह पहुंचने के बाद वहां लोकल घूमने को बहुत कुछ है आस पास।
    उसके बाद आप खारदुंगला, रेंचो स्कूल, पेंगोंग झील और नुब्रा घाटी जा सकते हैं।
    बजट तो हर किसी का अपना अपना होता है, और हर साल बदलता रहेगा। बाइक से जाने पर हमारा बीस हजार के करीब खर्च हुआ था। बस से जाने पर कुछ कम लग सकता है।

  6. श्रीमान। उपयोगी और ज्ञानवर्धक लेख के लिए आपका आभार। हम करीब 4 या 5 लोग 1 जून को लेह ओर लदाख जाने की सोच रहे हैं। सड़क मार्ग से बस द्वारा। कृपया मार्गदर्शन करें कि हमें क्या कुछ तैयारी करनी चाहिए। किस मार्ग से जाएं? कितना बजट पर्याप्त रहेगा और क्या-क्या देखना या घूमना चाहिए। उत्तराखण्ड में कई बार गया हूँ बद्रीनाथ तक। लेकिन लदाख जाने का ये पहला अवसर है। हम जींद हरियाणा के रहने वाले हैं और चण्डीगढ़ से जाना सरल रहेगा हमें। लेकिन मैंने सुना है कि बसें दिल्ली से चलती हैं और बीच से सवारी नहीं लेतीं। क्या हमें दिल्ली से ही बैठना होगा या कोई और रास्ता भी है?

    आपके त्वरित उत्तर की प्रतीक्षा में।

  7. ठीक है संजय जी, अगर किसी को जाना हो तो आपसे जरूर संपर्क कर लूंगा। धन्यवाद

  8. हाँ, कुछ जरूरी दवाईयां, माउंटेन सिकनेस की दवाई diamox भी ले जा सकतें हैं।

  9. रामबाबू जी, आपके प्रश्न का उत्तर तो मैंने ऊपर दे दिया है।सामानों की सूची पोस्ट में भी लिखी है जैसे गरम कपड़े, जूते, बूट्स। अगर बाइक से नही जा रहे, तो अधिक कुछ ले जाने की जरूरत नहीं है गर्म कपड़ों के सिवाय। धन्यवाद।

  10. आप मेरे प्रशन का उत्तर नही दिए rd. Ji मेरा प्रशन ये था कि समान की तैयारी में क्या क्या रखना होगा ? कृपया जल्दी उत्तर दे

  11. prajapati ji mujhe 15 june 2017 ko bike se agra se laddakh jana he agar aapke kisi any sajjan ki jankari he jo 15 june ke aaspas jana chahta ho to please mera no unhe de do mera w/a no 9058199365 he hum pati patni dono jayenge

  12. धन्यवाद प्रजापति जी,
    9 दिन की यात्रा है, खारदुंगला इत्यादि पैकेज टूर में सभी शामिल होगा। उसके हिसाब से तैयारी करनी होगी।
    बहुत बहुत धन्यवाद।
    रामबाबू अग्रवाल चिरमिरी जिला कोरिया छत्तीसगढ़

  13. यात्रा की अग्रिम शुभकामनायें रामबाबू जी! सिर्फ लेह शहर में मई के मौसम में तापमान पांच से पंद्रह डिग्री तक रहेगा, हल्के गर्म कपडे चल जायेंगे, परंतु अगर आप पेंगोंग-खर्दुन्गला वगेरह जाना चाहें तो ठण्ड और अधिक रहेगी, उसके लिए अच्छे मोटे गर्म कपड़ों के साथ साथ जूते भी चाहिए.

  14. मैं रामबाबू अग्रवाल चिरमिरी जिला कोरिया छत्तीसगढ़ से,आप सभी लेह लद्दाख की यात्रा का अनुभव पा चुके महानुभावों को सादर नमस्कार।
    कृपया मुझे बताएं मैं 19 मई 2017 को दिल्ली से हवाई यात्रा द्वारा लेह लद्दाख की यात्रा पर सपरिवार जा रहा हूँ।
    मुझे आज के लेह के मौसम के हिसाब से गर्म कपड़े,जूते इत्यादि की तैयारी किस प्रकार से करनी चाहिए?

  15. मेरा भी 20 मई से 25 मई 17 लेह जाने का प्लान है अच्छे सकारात्मक विचोरो के मित्र की तलाश है हम पति पत्नी 50 बर्ष के युवा है

  16. आपका सपना भी अगली घुमक्कड़ी मिलन में पूरा हो जायगा अगर लेह में हुआ तो!

  17. लददाख एक ऐसा इलाका जो मुझे हमेशा से ही आकर्षित करता है। यहां की नमक वाली चाय पीने का बहुत दिल करता है। आप तो यहां की सैर करके आए हैं इसके लिए आपको बहुत बहुत बधाई।

  18. बाइक से लद्दाख जाने के लिए राइडिंग जैकेट, राइडिंग दस्ताने, पैरों में पहनने वाले knee guards, बाइक का टूल किट, रेन कोट, हेलमेट, लगेज बांधने के लिए बंजी कॉर्ड – ये सब चाहिए।
    धन्यवाद किशन जी

  19. बहुत बढ़िया पोस्ट राम भाई….

    यात्रा से पहले की तैयारी जरूरी है..|

    मेरी भी लिस्ट में लद्दाख पर हवाई जहाज से …देखते है कब जाना होता है .

    धन्यवाद

  20. बहुत बढ़िया राम जी
    लद्दाख़ जाने की तैयारी में कुछ आवश्यक सामान की सूची भी बता देते तो अच्छा होता ।
    ठण्ड के कपडे के अलावा और क्या क्या चाहिए बाइक से लद्दाख जाने के लिए।
    मिशन लद्दाख़ की अगली क़िस्त का इंतजार रहेगा ।

  21. बहुत बढ़िया राम जी
    लद्दाख़ जाने की तैयारी में कुछ आवश्यक सामान की सूची भी बता देते तो अच्छा होता ।
    ठण्ड के कपडे के अलावा और क्या क्या चाहिए बाइक से लद्दाख जाने के लिए।
    मिशन लद्दाख़ की अगली क़िस्त का इंतजार रहेगा ।

  22. जी योगी जी, गर्मियों में ठण्ड के कपड़े खरीदने के लिए मुझे एक हफ्ते तक दुकानों के चक्कर लगाने पड़े, कई बार हास्यापद स्थिति उत्पन्न हो गयी.
    कमेंट कर उत्साहवर्धन के लिए आपका साधुवाद योगीजी.

  23. गर्मी के मौसम में ठण्ड के कपडे खरीदना भी बड़ा मुश्किल हो जाता है , दुकानदार भी ऐसे देखता है जैसे कोई एलियन आ गया हो , और अगर कैसे भी वहां दो चार लोग हुए तो बहुत सारे सवाल हो जाते हैं ! मैंने मई में भुगता ये सब , सतोपंथ जाने से पहले !! आगे का इंतज़ार रहेगा आरडी भाई

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