मिशन लद्दाख-7: मैग्नेटिक हिल का रहस्य और सिंधु-जांस्कर संगम (The Mysterious Magnetic Hill & Sindhu-Janskar Confluence)

27 जुलाई 2016: मिशन लद्दाख का छठा दिन। आपलोगों ने मैग्नेटिक हिल के बारे अवश्य ही सुना होगा या टीवी चैनलों और यूट्यूब पर इसके वीडियो जरूर देखें होंगे। ढलान पर चीजों का लुढ़कना तो आम बात है, लेकिन यहाँ स्थिति ठीक इसके विपरीत है।  उन विडियो में अपने देखा होगा की किस तरह गाड़ियां एक पहाड़ के चढ़ान पर खुद-ब-खुद चढ़ती जाती हैं। लेकिन क्या ये वास्तव में सच है? क्या वहां सच में कोई चुम्बकीय शक्ति मौजूद है? आखिर इस मैग्नेटिक हिल का रहस्य क्या है?

मिशन लद्दाख-1: तैयारियाँ (Preparing for Mission Ladakh)

मिशन लद्दाख-2: दिल्ली से मनाली (Mission Ladakh: Delhi to Manali)

मिशन लद्दाख-3: मनाली में बाइक का परमिट (Mission Ladakh: Obtaining Bike Permit in Manali)

मिशन लद्दाख-4: मनाली से भरतपुर (Mission Ladakh: Manali to Leh via Rohtang Pass-Keylong-Jispa-Darcha-Zingzingbar-Baralachala-Bharatpur)

मिशन लद्दाख-5: भरतपुर से लेह (Mission Ladakh: Bharatpur-Sarchu-Nakeela-Biskynala-Lachungla-Pang-Debring-Tanglangla-Upshi-Leh

मिशन लद्दाख-6: शे गुम्पा, लेह महल, शांति स्तूप और हॉल ऑफ़ फेम (Mission Ladakh: Shey Monastry, Leh Palace, Shanti Stupa and Hall of Fame)

मिशन लद्दाख-7: मैग्नेटिक हिल का रहस्य और सिंधु-जांस्कर संगम (The Mysterious Magnetic Hill & Sindhu-Janskar Confluence)

मिशन लद्दाख-8: रेंचो स्कूल (Mission Ladakh-8: Rancho School)

मिशन लद्दाख-9: चांगला से पेंगोंग (Chang La to Pangong Tso)

मिशन लद्दाख-10: पेंगोंग से नुब्रा और खारदुंगला (Pangong to Nubra and Khardungla)

यहाँ से लद्दाख़ बाइक यात्रा के सामान खरीद सकते हैं।

https://www.amazon.in/shop/travelwithrd?listId=1K9AFXGNQOU1O

Also Read:  मिशन लद्दाख-1: तैयारियाँ (Preparing for Mission Ladakh)

लेह से श्रीनगर की ओर जाने वाली हाईवे पर निम्मू तक तीन मुख्य चीजें हैं- एक पाथरसाहिब गुरुद्वारा, दूसरा मैग्नेटिक हिल, तीसरा सिंधु-जांस्कर का संगम। मैग्नेटिक हिल जाने से कुछ पहले यह गुरुद्वारा है, जिसके बारे अधिक जानकारी तो नहीं, फिर भी रास्ते में पड़ने के कारण लोग यहाँ थोड़ी देर रुकते जरूर हैं। हम भी रुक गए। वैसे मुझे धार्मिक चीजों में व्यक्तिगत तौर पर रूचि नहीं, फिर भी ऐतिहासिक महत्त्व की स्मारकों को अवश्य देख लेता हूँ। मेरे साथी बाइकर तो गुरूद्वारे के अंदर चले गए, और मैं बाहर मौके का फायदा उठा फिर से उन भूरे-नंगे पहाड़ों के फोटो लेने में खो गया। गुरूद्वारे से कुछ किलोमीटर आगे ही वो रहस्यमयी मैग्नेटिक हिल है, जो हर किसी के कौतुहल का विषय है। रोड के बांयी और इस पीले रंग के बोर्ड पर अंग्रेजी में लिखा है- एक ऐसी घटना जो गुरुत्वाकर्षण को मात दे! रोड पर बनाये गए बॉक्स पर अपनी गाडी रखिये और जादू अनुभव कीजिये! सड़कपरएक बॉक्स बना हुआ है जिसके अंदर लोग अपनी कारों और बाइकों को न्यूट्रल पर रखकर प्रयोग कर रहे थे। बॉक्स के एक ओर ढलान था, जबकि दूसरी ओर चढ़ान। और इस जादुई घटना के मुताबिक गाड़ियों को चढ़ान पर चढ़ना था। 


               एक बन्दा आया, उसने कार बॉक्स के अंदर पार्क की, लेकिन नतीजा कुछ न निकला, कार चढ़ान पर जाने के बजाय स्वाभाविक रूप से ढलान पर ही लुढ़कने लगी। इस तरह बहुत सारे लोगों ने इस पर प्रयोग किये। कुछ ने बाइक पर प्रयोग किया। हमलोगों ने भी बाइक न्यूट्रल पर रखी, पर नतीजा निराशाजनक ही रहा। हो सकता है की हमसे ही कोई चूक हो रही हो! जो भी हो, मैग्नेटिक हिल के करिश्मे को हम तो अनुभव न कर पाए, लेकिन वहीँ तमाम टीवी चैनलों ने इसके बारे गाड़ियों को उल्टी दिशा में लुढकते हुए ही दिखाया है, अलग-अलग विश्लेषण भी किया है, वैज्ञानिक या अवैज्ञानिक तरीके से। सबसे सटीक विशेलषण जो मुझे अब तक लगा है, वो है- नजरों का धोखा! शायद यहाँ चढ़ान के बजाय असल में ढलान ही हो, फिर भी हमें चढ़ान ही दिखता हो। ऐसी एक रहस्यमयी जगह गुजरात के किसी गाँव में भी है। 

Also Read:  मिशन लद्दाख-6: शे गुम्पा, लेह महल, शांति स्तूप और हॉल ऑफ़ फेम (Mission Ladakh: Shey Monastry, Leh Palace, Shanti Stupa and Hall of Fame)


                   अब यहाँ से आठ-दस किलोमीटर की दूरी पर निम्मू नामक स्थान पर लेह के आस-पास के अंतिम नज़ारे के रूप में था- सिंधु-जांस्कर का संगम। पहाड़ों पर आराम से बाइक दौड़ाते हुए दूर कहीं नीचे दो मटमैले रंग की जलधाराएं आपस में मिलती हुई दिख पड़ी! देखकर ही समझ आ गया की हो न हो, यही वो संगम है। अब हम इस पहाड़ से नीचे उतर रहे थे, और संगम करीब आ रहा था। कौतुहल बढ़ती जा रही थी। वो दो पतली जलधाराएं अब काफी चौड़ी नजर आने लगी। तो अब मेरे बांयी ओर थी ज़ांस्कर और दायीं ओर थी सिंधु। जांसकर तो वही नदी है जो सर्दियों में जम जाती है और जनवरी के महीने में लोग ऊपर चादर ट्रैक करते हैं, जबकि सिन्धु नदी पूरी तरह से नहीं जमती, बाद में यही सिन्धु पाकिस्तान में भी बहती है।

Also Read:  मिशन लद्दाख-4: मनाली से भरतपुर (Mission Ladakh: Manali to Leh via Rohtang Pass-Keylong-Jispa-Darcha-Zingzingbar-Baralachala-Bharatpur)


                  संगम पर पानी का प्रवाह काफी डरावना था, एक चबूतरा बना हुआ था, जहाँ खड़े हो हम फोटोग्राफी में भीड़ गए।  कुछ दूर आगे जाकर मैंने पानी को छूकर देखा, काफी ठंडा था पानी, अब जब छू लिया तो चखने की भी इच्छा हुई, और मुझसे रहा नहीं गया। पानी का स्वाद तो मुझे सामान्य ही लगा, लेकिन शायद इन भूरे चट्टानों के संपर्क में पानी का रंग गहरा हो गया होगा। शाम काफी ढल चुकी थी, और अँधेरा शुरू हो चूका था। वैसे यहाँ बोटिंग की भी सुविधा थी, लेकिन वक़्त के अभाव में यह हो नहीं पाया। लेह के आस-पास के सारे मुख्य स्थानों का हम दीदार  कर चुके और अब अगले दिन से पांगोंग की यात्रा करनी थी, एक बार फिर से लेह-मनाली हाईवे जैसी ही पथरीली मुश्किल डगर पर।

गुरुद्वारा पाथर साहिब

अगली पोस्ट में चलेंगे थ्री इडियट्स स्कूल होते हुए पेंगोंग की ओर !

Like Facebook Page: facebook.com/travelwithrd

Follow on Twitter: twitter.com/travelwithrd

Subscribe to my YouTube channel: YouTube.com/TravelWithRD.

email me at: travelwithrd@gmail.com