मेघालय यात्रा: शिलॉंग भ्रमण- शिलॉंग व्यू पॉइंट, एलिफेंट फॉल्स, और कैथेड्रल ऑफ़ मैरी चर्च (Meghalaya-Shillong Sightseeing-Shillong View Point, Elephant Falls and Cathedral of Marry Church)

भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों जिन्हें सेवन सिस्टर्स (Seven Sisters) भी कहा जाता है, मेघालय उनमें से एक है। सत्तर के दशक के शुरुआत तक मेघालय भी असम राज्य का ही हिस्सा हुआ करता था, बाद में इसे एक अलग राज्य का दर्जा दिया गया और शिलांग इसकी राजधानी बनी, परन्तु विभाजन के पहले से ही शिलांग दोनों राज्यों की सम्मिलित राजधानी थी, बाद में दिसपुर को असम की राजधानी बनाया गया था। याद रहे की मेघालय में प्रवेश के लिए किसी भी तरह के परमिट की कोई जरूरत नहीं पड़ती।

पूरब के स्कॉटलैंड- मेघालय यात्रा की तैयारियाँ (Scottland of the East- Meghalaya)

मेघालय यात्रा: शिलॉंग भ्रमण- शिलॉंग व्यू पॉइंट, एलिफेंट फॉल्स, और कैथेड्रल ऑफ़ मैरी चर्च (Meghalaya-Shillong Sightseeing-Shillong View Point, Elephant Falls and Cathedral of Marry Church)

मेघालय जिसका शाब्दिक अर्थ ही है- बादलों का घर। यह भारत का सबसे अधिक वर्षा वाला राज्य भी है, इस कारण इसकी प्राकृतिक छटा सदैव ही हरी-भरी रहती है। राज्य का नब्बे फीसदी से भी अधिक इलाका हरे-भरे सुन्दर पहाड़ों से सजा है, जिनकी औसत ऊंचाई चार-पांच हजार फीट के आस-पास है। यही कारण है की अंग्रेजों को भी ये जगह बहुत पसंद आई होगी जिस कारण उन्होंने इसे पूरब का स्कॉटलैंड (Scottland of the East) कह दिया।        

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चेरापूँजी: दुनिया का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान (Cherapunjee: The wettest land on Earth)

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          मेघालय में तीन प्रकार की पहाड़ियां हैं- गारो, खासी और जयंतियां। इन्हीं पहाड़ियों को दिशाओं के आधार पर बांटकर ग्यारह जिले बनाये गए हैं, राजधानी शिलांग और चेरापूंजी दोनों ही पूर्वी खासी की पहाड़ियों में स्थित है। मेघालय की सबसे ऊँची चोटी की ऊंचाई साढ़े छह हजार फ़ीट है, जिसे शिलोंग पिक (Shillong Peak) कहा जाता है। यहाँ से पूरे शहर का अद्भुत नजारा दिखाई देता है। चेरापूंजी तो चार-पांच साल पहले तक दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थान के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब इसकी जगह पास के मासिनराम (Mawsynram) ने ले ली है, चेरापूंजी दूसरे स्थान पर खिसक चुका है।  

                 गुवाहाटी से शिलोंग की सौ किमी की यात्रा कब खत्म हो गयी, पता भी न चला। शिलोंग शहर प्रवेश करने से पंद्रह किमी पहले सड़क के दायीं ओर एक बहुत बड़ा जलाशय दिखाई पड़ा जिसे उमियम झील या बड़ा पानी के नाम से जाना जाता है।  इस झील को देखने के लिए लोगों का काफी हुजूम था, लेकिन बीच रास्ते इस गाड़ी से उतरने पर दूसरी गाड़ी पकड़ कर शिलॉंग जाना पड़ता। इसलिए पहले शिलोंग मुख्य बाजार में ही उतरे जिसे पुलिस बाजार इलाका कहा जाता है।

                         पिछले दो सालों से मुझे ऑनलाइन होटल बुकिंग की आदत लग गयी थी, लेकिन नेट पर जब शिलोंग में होटल खोजना शुरू किया, तो बात कुछ जमी नहीं। अधिकतर बड़े होटल ही नेट पर थे, जिनका ऑनलाइन बुकिंग संभव था, बाकि बजट वालों का कुछ पता न चल पाया। इसलिए बड़े दिनों बाद किसी शहर में आज होटल ढूँढना पड़ रहा था। शिलोंग के पुलिस बाजार इलाके में कुछ गिने-चुने बजट होटल दिखाई दिए, जिनके किराये हजार रूपये के आस-पास थे। मेघालय में होटलों की संख्या हिमालयी हिल स्टेशनों जितनी नहीं है। जो कुछ भी हैं, कम हैं, गिने-चुने। अंत में मुझे कुछ सुझा नहीं तो भारत सेवाश्रम संघ दिखाई पड़ा, वहीँ पर उन्होंने सात सौ रूपये के हिसाब से एक कमरा दे दिया।

                      कमरे की समस्या तो हल हो गयी। मौसम बड़ा खुशनुमा था और खिड़की से धूप भी आ रही थी। ऐसे मौसम में शहर घूमने का मजा दुगुना होने वाला था। शिलोंग लोकल भ्रमण के लिए मैंने आठ-दस चीजों को दिमाग में रखा था। एक उमियम झील भी था, जिसकी एक झलक गुवाहाटी से आते वक़्त ही मिल चुकी थी। शिलोंग में महंगाई भी कुछ ज्यादा थी, इसलिए ऑटो-टैक्सी वाले एक दिन के शिलोंग भ्रमण के लिए हजार रूपये तक मांग रहे थे। एक टैक्सी वाले को आठ सौ रूपये में राजी करवाया।

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सबसे पहले शहर से करीब दस किमी दूर मेघालय की सबसे ऊँची छोटी शिलोंग पिक की तरफ बढ़े। यहाँ से पूरे शहर का एक एरियल व्यू मिलता है। मेघालय चाहे पूर्वोत्तर भारत का ही एक छोटा सा राज्य क्यों न हो, पर सड़कें एकदम लाजवाब हैं। सड़क पर एक भी फालतू का कचड़ा नहीं, बिल्कुल साफ़ सुथरा। यह इलाका भारत जैसा लगता ही नहीं। शिलोंग पिक का इलाका भारतीय सेना के अधीन होने के कारण प्रवेश द्वार पर एक पहचान पत्र जमा करना अनिवार्य होता है, फिर दो किलोमीटर आगे तक जाने के बाद ही शिलोंग की चोटी मिलती है। वापस आने पर परिचय पत्र वापस कर दिया जाता है। पहचान पत्र जमा करने की पहले जरुरत नहीं पड़ती थी, लेकिन जनवरी 2016 में पठानकोट हमलों के बाद एहतियातन सेना के द्वारा ऐसा कदम उठाया गया है।

पहले तो मुझे लगा था की शिलोंग पीक सिर्फ शिलोंग की सबसे ऊँची चोटी है, पर ये पूरे मेघालय की ही सबसे ऊँची चोटी है जिसकी ऊंचाई साढ़े छह हजार फ़ीट है। यह खासी की पहाड़ियों में स्थित है। मेघालय के पहाड़ों में भले बर्फ न मिले पर हरियाली बहुत सुन्दर है। अंग्रेजों ने इसे स्कॉटलैंड ठीक ही कहा था। पूरी तरह से नाना प्रकार के बाग़-बगीचों से सजे ठंडी-ठंडी हवाओं वाले इस जगह की सुंदरता के क्या कहने! यहाँ से नीचे देखने पर शिलोंग शहर का जो नजारा दिखता है, वो किसी भी हिमालयी हिल स्टेशन से किसी भी सूरत में कम नहीं है।

     फिर शहर के केंद्र से बारह किलोमीटर दूर एलीफैंट फाल्स की तरफ बढ़े।  एलीफैंट फाल्स शिलोंग के आस-पास का एक प्रमुख दर्शनीय केंद्र है। इस जलप्रपात की खासियत यह है की यहाँ पानी तीन चरणों में गिरता है और स्थानीय लोग भी इसे पहले थ्री स्टेप्स फॉल्स (Three Steps Falls) इस कहा करते थे। बाद में अंग्रेजों ने इस प्रपात के सामने कोई हाथी आकार का कोई चट्टान देखा, और इसे एलीफैंट फॉल्स का नाम दे दिया। सन 1897 के भूकंप के बाद यह चट्टान नहीं रहा, पर अभी तक इसका नाम एलीफैंट फाल्स ही है। सीढ़ियों से काफी नीचे जाने में आधे घंटे का वक़्त लग ही जाता है, और जलप्रपात के अलग-अलग स्तर दिखाई देते हैं। शाम के वक़्त पर्यटकों की अच्छी भीड़ हो जाती है।

एलीफैंट प्रपात के बाद हम चलते हैं पूर्वोत्तर भारत से सबसे बड़े चर्चों में से एक केथेड्रल ऑफ़ मैरी हेल्प क्रिसचियन्स (Cathedral of Marry Help Christians) या सीधे शब्दों में कैथड्रल मैरी चर्च। यह चर्च बिल्कुल यूरोप के किसी भवन जैसा ही है। इस चर्च के आस-पास खड़े होने पर कुछ देर के लिए पश्चिमी देशों जैसा नजारा महसूस होने लगता है। आज तक जितने भी चर्च मैंने देखें हैं, उनमें यह सबसे अधिक सुन्दर लगा। भारत के सबसे बड़े चर्च माने जाने गोवा का जो सफ़ेद केथेड्रल चर्च है, यह उससे भी कहीं अधिक भव्य है।

शिलॉंग शहर का भ्रमण अभी खत्म नहीं हुआ है तब तक आप इन तस्वीरों का लुत्फ़ उठाइये…अगली पोस्ट में आपको ले चलूँगा शिलांग का प्रसिद्द गोल्फ कोर्स, लेडी ह्याद्री पार्क तथा डॉन बोस्को म्यूजियम की ओर!शिलॉंग चोटी से नजारा 

चलें अब एलीफैंट फॉल्स की ओर 

केथेड्रल ऑफ़ मैरी हेल्प क्रिस्टियन्स 

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