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Showing posts from January, 2016

भारत का अंतिम छोर और वो टापूनुमा विवेकानंद रॉक (Kanyakumari, India)

केरल के कोवलम तट के सौंदर्य से मुखातिब होने के बाद पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हमारा अगला पड़ाव था -त्रिभुजाकार भारत के दक्षिणतम छोर कन्याकुमारी  पर  जिसे पहले केप-कोमोरिन के नाम से भी जाना जाता था। सबसे रोमांचक तथ्य यह है की यहाँ तीन समुद्रों- हिन्द, अरब और बंगाल की खाड़ी का अद्भुत संगम है। अभी तक मैंने जितने भी समुद्र तट देखे हैं, उनमे से यह सबसे अनोखा क्यों है?  The Vivekananda Rock Behind "Our Lady of Ransom Church", Kanyakumari क्योंकि यहाँ आप समुद्र का लगभग 2004 में आये सुनामी के बाद पुनर्जीवित एक एकांत तट में कुछ पल (Chotavilai Beach, Tamilnadu) भारत का अंतिम छोर और वो टापूनुमा विवेकानंद रॉक  (Kanyakumari, India) नीलगिरि माउंटेन रेलवे, ऊटी  (Nilgiri Mountain Railway: Ooty to Coonoor) ये हंसी वादियाँ आ गए हम कहाँ- ऊटी (Romance of Ooty) 270 डिग्री तक का वृताकार तट देख सकते हैं। जब आप समुद्र की ओर खड़ा होते हैं, तो बायीं तरफ बंगाल की खाड़ी, बीच में हिन्द महासागर, और दायीं ओर अरब सागर का एक साथ दीदार कर सकते हैं। त्रिवेंद्रम से नागरकोइल होत

आखिर तटों के अलावा और क्या है खास केरल में? ( Kerala Backwaters)

केरल दर्शन के पहले चरण में मैं आपको ले चला था इसकी सुकूनभरी तटों की और। तटों के अलावा भी भला ऐसा क्या है केरल में जो बेहद खास है? जी हाँ! अप्रवाही जल या यूँ कहें बैकवाटर जो की अनेक नदियों, झीलों, नहरों और सागरीय जल से बना एक अनूठा जलतंत्र है। अल्लेप्पी बैकवाटर पर्यटन का मुख्य गढ़ है, परन्तु मैं आपको ले चलूँगा कोवलम से 16 किमी दूर स्थित पूवार के बैकवाटर की ओर।       यूँ तो समूचे केरल में ही बैकवाटर का जलतंत्र फैला पड़ा है, उनमे से कुछ पर्यटन हेतु विकसित किये गए हैं  तिरुवनंतपुरम से 16 किमी की दुरी पर पूवार एक छोटा सा जगह है, जो की अल्लेप्पी का विकल्प है। यहाँ पर पानी के इस विशाल तंत्र में रातें गुजारने के लिए हाउसबोट उपलब्ध रहते हैं। दिसंबर-जनवरी के महीने में तो यह यात्रा काफी महँगी हो जाती है। लेकिन साथ ही जल-विहार हेतु छोटे मोटरबोट भी उपलब्ध हैं। वैसे जून में तो ऑफ-सीजन के वजह से हमें सिर्फ पंद्रह सौ रूपये में ही बोट मिल गयी, वरना जाड़े के मौसम में इनका भाव पच्चीस सौ से ऊपर ही होता है। ज्यों ही हमारी जलयात्रा प्रारम्भ हुई, दोनों तरफ से झुके हुए नारियल के वृक्ष मान

केरल के इन सुकूनभरी तटों पर भी एक नजर (Kovalam Beach, Kerala)

केरल, एक ऐसा राज्य जिसका नाम आते ही मन में भारतीय मानचित्र के त्रिभुजाकार दक्षिणी हिस्से की छवि उभर कर आती है। घनी हरियाली से आच्छादित पर्वतमालाएं, नारियल-केले के पेड़ और अरब सागर के लहरों को स्पर्श करती इसकी तटों का तो कोई जवाब ही नहीं है।  आयुर्वेद के खज़ाने से भरे और चन्दन के पेड़ों से सुगन्धित वन केरल के अमूल्य धरोहर हैं। कण-कण में बसी हरियाली ही इस राज्य की मुख्य पहचान है। अगर पर्यटन के दृष्टिकोण से देखा जाय तो लोग यहाँ - मुख्यतः समुद्रतटों और अप्रवाही जल यानि बैकवाटर्स एवं हाउसबोट का आनंद लेने आते हैं। बैकवाटर और हाउसबोट का मुख्य गढ़ तो अल्लेप्पी में है, लेकिन तटों के मामले में तो कोवलम ही सर्वश्रेष्ठ है।            कोयंबटूर से रातभर की ट्रेन यात्रा कर सुबह सुबह केरल की सीमा प्रवेश करते ही सिर्फ नारियल व केले के घने-घने जंगलो और अनगिनत जलाशयों की जो हरी-भरी श्रृंखला प्रारंभ हुई, केरल की काल्पनिक छवि जो मेरे मन में थी, उसे धीरे-धीरे हकीकत में बदलते हुए पाया। राजधानी त्रिवेंद्रम या तिरुवनंतपुरम से मात्र 16 किमी की ही दुरी पर है -सुविख्यात कोवलम तट। यूँ तो यहाँ देश-विदेश के सैल