केरल के इन सुकूनभरी तटों पर भी एक नजर (Kovalam Beach, Kerala)

केरल, एक ऐसा राज्य जिसका नाम आते ही मन में भारतीय मानचित्र के त्रिभुजाकार दक्षिणी हिस्से की छवि उभर कर आती है। घनी हरियाली से आच्छादित पर्वतमालाएं, नारियल-केले के पेड़ और अरब सागर के लहरों को स्पर्श करती इसकी तटों का तो कोई जवाब ही नहीं है। आयुर्वेद के खज़ाने से भरे और चन्दन के पेड़ों से सुगन्धित वन केरल के अमूल्य धरोहर हैं। कण-कण में बसी हरियाली ही इस राज्य की मुख्य पहचान है। अगर पर्यटन के दृष्टिकोण से देखा जाय तो लोग यहाँ – मुख्यतः समुद्रतटों और अप्रवाही जल यानि बैकवाटर्स एवं हाउसबोट का आनंद लेने आते हैं। बैकवाटर और हाउसबोट का मुख्य गढ़ तो अल्लेप्पी में है, लेकिन तटों के मामले में तो कोवलम ही सर्वश्रेष्ठ है।

          कोयंबटूर से रातभर की ट्रेन यात्रा कर सुबह सुबह केरल की सीमा प्रवेश करते ही

सिर्फ नारियल व केले के घने-घने जंगलो और अनगिनत जलाशयों की
जो हरी-भरी श्रृंखला प्रारंभ हुई, केरल की काल्पनिक छवि जो मेरे मन में थी, उसे धीरे-धीरे हकीकत में बदलते हुए पाया। राजधानी त्रिवेंद्रम या तिरुवनंतपुरम से मात्र 16 किमी की ही दुरी पर है -सुविख्यात कोवलम तट। यूँ तो यहाँ देश-विदेश के सैलानियों का खासकर जाड़ों में खूब ताँता लगे रहता है, लेकिन मैं भीड़-भाड़ की दुनिया से बचते हुए जून के ऑफ-सीजन वाले महीने में गया था, फिर भी आनंद में कोई ख़ास कमी नहीं आई ।

     तिरुवनंतपुरम रेलवे स्टेशन के समीप ही कोवलम जाने वाली बस में सवार होकर उस अद्भुत केरलीय सौन्दर्य को महसूस करने हम निकल पड़े। शहरी इलाका ख़त्म होने लगी, सड़क के दोनों ओर नारियल-केले के पेड़ों की कतारबद्ध पंक्तियों ने कही भी हमारा पीछा करना नहीं छोड़ा। आधे घंटे बाद कोवलम बस स्टॉप आ गया, तट की ओर जाने के लिए ढलान वाली रास्ते पर चलते-चलते दूर से ही समुद्र नजर में आ गया और बादलों वाली सुबह को इसकी पहली छटा कुछ यूँ थी –

रास्ते के दोनों और अनेक होटलों-रेस्त्रों-दुकानों की कतार थी। सबसे ख़ुशी की बात यह थी की हमारा भी होटल बिलकुल तट पर ही था और जल्दी जल्दी प्रवेश कर इसकी बालकोनी से अथाह समुद्र का दीदार करते ही चहक उठा-

थोड़ी देर बाद तट की ओर निकल पड़ा। नंगे पैरों से बालू पर चलने की बात ही कुछ और थी। इस अर्धवृताकार समुद्र तट की सुन्दरता की तुलना अक्सर गोवा के तटों से की जाती रही है। गोवा की तरह यहाँ भी मैंने यही  पाया की विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने के मामले में केरल भी पीछे नहीं है। वास्तव में कोवलम तट तीन भागों में बटा हुआ है – हवा तट (Hawa Beach), लाइटहाउस तट (Light House Beach), और समुद्र तट (Samudra Beach), लेकिन इनमे से सिर्फ पहले दो तट ही लोगों को खींचने में कामयाब हो पाते हैं, अंतिम तट जरा अछूता रह जाता है।

                   हवा और लाइट हाउस तट दोनों अगल-बगल ही हैं, एक ओर विशाल समुद्र है जबकि दूसरी ओर होटलों एवं रेस्त्रों की कतार सी है। बड़े बड़े चट्टानों से टकराती हुई लहरों की ध्वनि आस-पास के सन्नाटे को चीरती है, साथ ही चट्टानों पर एक व्यू पॉइंट भी है जहाँ से असीम सागर का अवलोकन काफी अच्छे से किया जा सकता है। वैसे दिन के वक़्त उस समय भीड़-भाड़ नहीं थी, किन्तु शाम होते ही चहलकदमी शुरू हो गयी। जेब के ख्याल से एक बात और बता दूँ की बिलकुल तट पर स्थित रेस्त्रां में भोजन करना जरा महंगा सौदा था, लेकिन ऊपर बस स्टॉप की ओर जाने पर महंगाई से थोड़ी राहत जरूर थी।

 

लाइट हाउस तट के बिलकुल अंतिम छोर पर एक लाइट हाउस ( एक प्रकार का टावर) स्थित है, जिसके नाम पर ही तट का नाम पड़ा। दूर से छोटा लगने वाला यह टावर नजदीक से काफी ऊँचा था। इस टावर पर चढ़ने के लिए काफी घुमावदार सीढियाँ चढ़नी पड़ी।

चढ़ते -चढ़ते टावर पर बनी खिडकियों से लहरों का नजारा कुछ ऐसा था-

   ऊंचाई पर चढ़ते ही हवा के जोरदार झोंके ने पुरे शरीर के रोंगटे खड़े कर दिए। ऐसा लगा मानो हेलीकाप्टर से पुरे कोवलम के ऊपर उड़ रहे हों। 118 फ़ीट ऊँची इस लाइट हाउस पर चढ़कर मैंने खुद को अरब सागर के विकराल स्वरुप और नारियल पेड़ों के घने झुरमुटों में खोया हुआ पाया।

 

 

 इस पर चढ़कर अरब सागर का विशाल नजारा कही और पाना सचमुच दुर्लभ है।

न जाने इन सबका दीदार करते करते कब दिन ढल गया, सूर्यास्त दर्शन हेतु लोगों की आवाजाही में जरा इजाफा हुआ। और सबसे दिलचस्प नजारा तो हमारे होटल की बालकोनी से ही था, अँधेरा होते ही समुद्र ने एक डरावने काले साये का रूप धारण कर लिया और रात भर लहरों से निकलती आवाजों ने हमारे कानों को खड़ा रखा।

 

केरल के ये खूबसूरत समुद्री नजारे तो दुनिया भर से लोगों को अपनी ओर खींचते ही रहेंगे, लेकिन इनके अलावा हमें एक और दिन रोमांचकारी बैकवाटर में बिताना था। तो फिर अगले हफ्ते रहिये तैयार पुवार के बैकवाटर का आनंद लेने के लिए।

इस हिंदी यात्रा ब्लॉग की ताजा-तरीन नियमित पोस्ट के लिए फेसबुक के TRAVEL WITH RD
 पेज को अवश्य लाइक करें या ट्विटर पर  RD Prajapati  फॉलो करें।
 इन्हें भी देखें 
इस यात्रा ब्लॉग में आपके सुझावों का हमेशा स्वागत है। अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए मुझे travelwithrd@gmail.com पर भी संपर्क कर सकते हैं। हमें आपका इंतज़ार रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *