Skip to main content

Posts

Showing posts from February, 2016

जमशेदपुर से नेपाल (काठमांडू) तक की बस यात्रा (Jamshedpur to Nepal By Bus)

नेपाल यानि हिमालय की गोद में बसा हुआ एक छोटा सा देश- जिसे हम गौतम बुद्ध की जन्मभूमि कहें या पिछले वर्ष आये विनाशकारी भूकंप का शिकार- हमेशा से ही भारत के सबसे निकटतम पडोसी देशों में शुमार रहा है। यही कारण है की दोनों देशों की ढेर सारी सभ्यता-संस्कृति भी बिलकुल एक जैसी रही हैं। यह हमारा सौभाग्य ही था की उस भयावह भूकंप से ठीक पहले ही नेपाल जाने की आकस्मिक योजना बन पड़ी और हमारी नेपाल यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हो गयी।  दिलचस्प बात यह है की  जमशेदपुर से काठमांडू तक एक हजार किलोमीटर की सारी यात्रा सिर्फ बस द्वारा ही तीन चरणों में की गयी, वो भी जून 2014 के भीषण गर्मी में  पहले हम पांच दोस्तों को पटना जाना था, जहाँ एक रात काठमांडू के नज़ारे- पशुपतिनाथ, बौद्धनाथ, भक्तपुर दरबार और नागरकोट- नेपाल भाग -2 (Kathmandu- Nepal Part-II) काठमांडू से पोखरा- सारंगकोट, सेती नदी, गुप्तेश्वर गुफा और फेवा झील (Pokhara- Nepal Part-III) नेपाल से वापसी- बनारस में कुछ लम्हें (Banaras- Nepal IV)  जमशेदपुर से नेपाल (काठमांडू) तक की बस यात्रा (Jamshedpur to Nepal By Bus) दोस्त की शादी में भी शरीक होना था। तीन जून 2

पुरी, कोणार्क और भुबनेश्वर की एकदिवसीय त्रिकोणीय यात्रा (Puri, Konark and Bhubaneshwar)

भारत के पूर्वी घाटों में पुरी अपने सुनहरे समुद्रतटों और मंदिरों के लिए सुविख्यात है, साथ ही साथ कोणार्क का विश्वविख्यात सूर्य मंदिर और भुबनेश्वर का लिंगराज मंदिर - ये दोनों मिलकर पुरी के साथ एक त्रिभुजाकार पर्यटन पथ का निर्माण करते हैं। पुरी का जगन्नाथ मंदिर तो काफी प्रसिद्ध है ही, साथ ही इससे सम्बंधित यहाँ और भी अनेक मंदिर हैं। पुरी के मुख्य सड़क में रथ मेले में लोगों की अपार भीड़ लगती है। इस त्रिकोणीय यात्रा के लिए पूरी से ही रोजाना टूरिस्ट बसें चलती हैं, जो प्रातः सात बजे निकलकर सबसे पहले चन्द्रभागा, कोणार्क, धौलगिरी, उदयगिरि-खण्डगिरि की गुफाएं, भुबनेश्वर का लिंगराज मंदिर तथा अंत में नंदन कानन अभ्यारण्य  से होते हुए शाम के सात बजे वापस लौटती हैं। सस्ती और आसान यात्रा के लिए ये बसें सबसे ज्यादा उपयुक्त हैं।    आज के इस पोस्ट में इसी एक दिवसीय यात्रा के बारे बताने जा रहा हूँ।  पुरी के समुद्रतट एक सुनहरी छटा प्रस्तुत करते हैं। जहाँ पश्चिमी घाट पर स्थित गोवा में मुझे लगा की वहां के तट चाँदी जैसे चमकते हैं, वहीं पुरी के तट थोड़ी लालिमा लिए हुए हैं। स्वर्गद्वार ना

एक शाम भारत के एक वातानुकूलित महानगर की (IT Capital of India: Bangalore)

महानगर! यानि की भीड़-भाड़, भाग-दौड़, गर्मी-पसीना! लेकिन भारत में बैंगलोर(बंगलुरु) ही एक ऐसा महानगर है जहाँ मौसम सदा सुहावना बना रहता है। दक्कन के पठार पर समुद्रतल से 1000 मीटर पर होने के कारण यहाँ एक प्रकार का प्राकृतिक वातानुकूलन मौजूद है। मौसम के खुशमिजाजी के कारण ही अन्य महानगरों की तुलना में बैंगलोर काफी पसंद किया जाता रहा है। दक्षिण भारत यात्रा के अंतिम पड़ाव में ऊटी, केरल और कन्याकुमारी से नागरकोइल होते हुए एक शाम हमने बैंगलोर में गुजारी। बैंगलोर पैलेस: दीवारों पर हरियाली  कन्याकुमारी के समीप के नागरकोइल से रातभर ट्रेन का सफर कर सुबह सुबह बैंगलोर सिटी स्टेशन पर दाखिल होते ही यहाँ के सुहावने मौसम ने सारी थकान मानो एक झटके में दूर कर दी। यहाँ रुकने का कार्यक्रम सिर्फ एक ही दिन का था, फलतः जल्दबाजी में शहर भ्रमण हेतु टूरिस्ट बस की सेवा लेना ही श्रेयस्कर तो जान पड़ा, किन्तु ट्रेवल एजेंटों की चालाकी का भी थोड़ा शिकार होना पड़ा। उनके द्वारा उपलब्ध कराये गए बस में सीटों की संख्या ही कम पड़ गयी, लेकिन इसपर उनलोगों ने पूर्णतः उदासीन रवैया अपनाया। साथ ही यह भी पता चला की वे लोग जिसे

2004 में आये सुनामी के बाद पुनर्जीवित एक एकांत तट में कुछ पल (Chotavilai Beach, Tamilnadu)

कन्याकुमारी के विवेकानंद रॉक तथा कुछ अन्य समीपवर्ती समुद्र तटों व स्मारकों से दो चार होने के दौरान स्थानीय लोगों से बातचीत के जरिये ही एक ऐसे तट का नाम सुन रखा था जो मुख्य शहर से थोडा सा बाहर है, किन्तु बिलकुल शांत और अपने आप में इतना अनोखा की प्रचलित समुद्री किनारों की चमक भी फीकी पड़ जाय ! साथ ही चार किलोमीटर तक फैले  कारण यह तमिलनाडु के सबसे लम्बे तटों में से भी एक है।  अगले दिन की शाम हमें नागरकोइल होते हुए बैंगलोर की ओर प्रस्थान करना था, इसीलिए सुबह के बचे हुए खाली वक़्त को यूँ ही ट्रेन के इंतज़ार में बर्बाद होने नहीं दिया और निकल पड़े उस अनूठे तट की ओर! छोठाभिलाई या सोथाभिलाई तट की पहली झलक  कन्याकुमारी से मात्र दस-बारह किमी 2004 में आये सुनामी के बाद पुनर्जीवित एक एकांत तट में कुछ पल (Chotavilai Beach, Tamilnadu) भारत का अंतिम छोर और वो टापूनुमा विवेकानंद रॉक  (Kanyakumari, India) नीलगिरि माउंटेन रेलवे, ऊटी  (Nilgiri Mountain Railway: Ooty to Coonoor) ये हंसी वादियाँ आ गए हम कहाँ- ऊटी (Romance of Ooty) पर ही है छोठाभिलाई  या सोथाभिलाई तट  जिसके लिए सिर्फ कुछ घंटो