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Showing posts from October, 2018

बैंकाक शहर: वाट फ़ो और वाट अरुण (Bangkok City: Wat Pho and Wat Arun)

थाईलैंड यात्रा के तीसरे दिन हम वापस बस पकड़ पटाया से बैंकाक आ गए। बैंकाक में हमें सिर्फ दो दिनों के लिए ही रुकना था लेकिन इतने बड़े शहर के लिए सिर्फ 2 दिन बिल्कुल नाकाफी थे। फिर भी हमारी कोशिश रही कि कम से कम मुख्य स्मारक देख लिए जाएं। बैंकाक सफारी वर्ल्ड जो दुनिया के सबसे बड़े चिड़ियाघरों में गिना जाता है, उसके लिए एक पूरा दिन चाहिए था, वहां जाना हमारा तय भी था, इस कारण बैंकाक के बाकी स्थलों को देखने के लिये हमारे पास सिर्फ 1 दिन ही था।                                   तो सुबह 10-11 बजे के करीब हम बैंकाक के सियाम इलाके के होटल ए वन आ पहुँचे जिसकी ऑनलाइन  बुकिंग हमने मेक माय ट्रिप से करीब अठारह सौ रु के आस पास की थी, फ्री ब्रेकफास्ट के साथ। वैसे अगर आप अकेले हों तो होस्टल भी ले सकते हैं जिसमें फ्री ब्रेकफास्ट भी मिल जाता है, चार-पांच सौ रु में एक बेड का किराया होता है। हम तीन थे, इस कारण हमने होटल ही लेना ठीक समझा था।                                      बैंकाक की अनजान गलियों में हम पैदल निकल पड़े। यहां भाषा की दिक्कत थी क्योंकि कम लोग ही अंग्रेजी समझ पाते हैं थाईलैंड में, और तो और

पटाया की एक शाम और कोरल द्वीप की सैर (Walking Street and Coral Island, Pattaya)

बैंकाक से पटाया तय करने और होटल तक पहुंचने में ही आधा दिन निकलने के बाद उस दिन बची थी सिर्फ शाम। सुना था कि पटाया कभी न सोने वाला एक शहर है, जहां रात भर चकाचौंध रहती है, गाड़ियाँ, टुकटुक...का रात भर सड़कों पर दौड़ना, रातभर होटलों के रिसेप्शन काउंटर का खुला रहना...डिस्को...पार्टी...इन सबके लिए पटाया को जाना जाता है।