Skip to main content

पटाया की एक शाम और कोरल द्वीप की सैर (Walking Street and Coral Island, Pattaya)

बैंकाक से पटाया तय करने और होटल तक पहुंचने में ही आधा दिन निकलने के बाद उस दिन बची थी सिर्फ शाम। सुना था कि पटाया कभी न सोने वाला एक शहर है, जहां रात भर चकाचौंध रहती है, गाड़ियाँ, टुकटुक...का रात भर सड़कों पर दौड़ना, रातभर होटलों के रिसेप्शन काउंटर का खुला रहना...डिस्को...पार्टी...इन सबके लिए पटाया को जाना जाता है। 

                           
समुद्र तट पर बसे होने के कारण स्वाभाविक है कि आस-पास कुछ द्वीप भी होंगे ही, इनमें से एक प्रसिद्ध द्वीप है कोह लर्न (Koh Larn) द्वीप जिसे बोलचाल में कोरल द्वीप कह दिया जाता है। गल्फ ऑफ थाईलैंड की यह तट भी भारत के अंडमान निकोबार तट जैसी नीली दिखती है, परंतु उतनी साफ सुथरी तो नहीं कही जा सकती क्योंकि अत्यधिक पर्यटकों के आगमन के कारण नैसर्गिक सौंदर्य का नष्ट हो जाना तय है।

                        पटाया शहर का चमक दमक वाला इलाका 'वाकिंग स्ट्रीट' के नाम से जाना जाता है, जहां शाम होते ही रंगारंग कार्यक्रम की शुरुआत हो जाती है। परंतु हमारे होटल से कुछ दूरी के कारण वहां बार-बार आने जाने में हमें जरा असुविधा हुई। सड़क पर खड़े होकर कुछ देर टुकटुक का इंतज़ार करना पड़ता और पंद्रह-बीस मिनट में हम दस बहत का भाड़ा देकर पटाया के बाजार वाले इलाके में पहुंच जाते। थाईलैंड में खूबसूरत समुद्र तट हैं, प्राकृतिक नजारे हैं, बौद्ध भिक्षुओं का देश है, फिर भी आज इसे एक देह व्यापार के केंद्र के रूप में भी जाना जा रहा है और इसके लिए काफी हद तक बदनाम भी है, यहाँ तक की थाईलैंड जाने वाले पर्यटक भी। थाईलैंड में यह अभी तक कानूनी रूप से मान्य नहीं, फिर भी समाज में काफी हद तक अघोषित मान्यता प्राप्त है जिस कारण यह धंधा काफी फल फूल रहा है।

                           खैर घुमक्कड़ होने के नाते एक सरसरी निगाह इस शहर पर रखनी ही थी, तो नींद से जाग शाम होते ही टुकटुक पकड़ हम वाकिंग स्ट्रीट की तरफ बढ़ चले। दिन में आते वक्त जिस रास्ते एक मक्खी भी न भनभना रही थी, शाम का नजारा बिल्कुल उल्टा ही था। सारी रंगीन लाइटें जल उठी थीं, सारे दुकान, रेस्तरां जाग उठे थे। दुनिया भर से आये हुए पर्यटकों के दर्शन हो रहे थे, कोई जर्मनी से था, कोई रूस से, कोई ऑस्ट्रेलिया, कोई कहीं और से। टुकटुक में बैठे बैठे सबसे पहले हमारी मुलाकात दो रूसियों से ही हुई थी।

                                वाकिंग स्ट्रीट डेढ़-दो किलोमीटर लंबी एक पैदल सड़क है, सड़क के दोनों तरफ सिर्फ तड़क-भड़क वाले डिस्को, बार आदि की ही भरमार है। कहीं कहीं हिंदी गाने भी सुनने को मिल रहे थे। डांस-डिस्को बार में काम करने वाले बहुत सारे भारतीय भी थे जो हिंदी में ही बात करते और अपनी-अपनी दुकानों की तरफ राहगीरों को खींचने की कोशिश करते। एक जगह हमें थाई बॉक्सिंग देखने को मिला जहाँ काफी भीड़ थी। सड़क पर कुछ लड़कों का झुण्ड करतब दिखाता पाया गया, लोग घेर कर उन्हें देखते और कुछ पैसे उनकी झोली में डाल देते। एक आदमी अपने पूरे शरीर में ही आईने के टुकड़े लगा कर पैसे मांगने की जुगत में जुटा था, लोग खूब आकर्षित भी हो रहे थे, जबकि सामने गिटार पर गाने वाले लड़के को कोई पूछ भी नहीं रहा था। सबसे अधिक शराब के विज्ञापन ही पटे पड़े थे, मालिक भी लड़कियों को पोस्टर पकड़ा कर यही सब करवाते हैं। कुल मिलाकर म्यूजिक के नाम पर सिर्फ शोर शराबा, शराब, कॉल गर्ल्स, हल्ला-गुल्ला- एक घोर पतनमुखी पाश्चात्य संस्कृति की झलक देखने को मिली, इससे अधिक वर्णन अब सम्भव नहीं, बाकी हाल आप मेरे यूट्यूब वीडियो पर देख सकते हैं जिसका लिंक इस पोस्ट के नीचे दिया गया है।  

                                  थाईलैंड में आज पहला दिन था, रात के खाने की खोज में हमने कुछ भारतीय रेस्तरां ढूंढे लेकिन वहां के महंगे मेनू के कारण हमें पीछे हटना पड़ा। एक पंजाबी ढाबा मिला जहाँ चालीस-पचास रूपये की एक तंदूरी रोटी और चार सौ रूपये की मिक्स वेज भला हमारे बजट से तो बाहर ही था। खूब मुनाफा बटोर रहे हैं ये तथाकथित इंडियन रेस्तरां वाले जबकि दूसरी ओर अगर आप थाई स्ट्रीट फ़ूड की तरफ मुंह घुमाये तो आपका काम सौ रूपये में भी हो सकता है, बशर्ते आप निरामिष न हों। हम तीन इस मामले में सही थे और हमने जमकर थाई फ़ूड का आठ दिनों तक आनंद उठाया। निरामिष खाने वालों के लिए थाईलैंड में विकल्प जरा कम तो हैं, लेकिन महंगे जैसे ब्रेड, फल जैसे केले, आम, आदि। सेवन इलेवन के स्टोर में वेजीटेरियन  लोगों के लिए काफी कुछ उपलब्ध है मगर जरा संभल कर! न जाने किस ब्रेड या केक में अंडे या पोर्क का अंश मिल जाए! इसलिए पैकेट पर इंग्रेडिएंट्स देखकर ही लेने में भलाई है। 

                       वाकिंग स्ट्रीट जिस जगह खत्म होती है, उसके कुछ आगे ही पैदल दूरी पर एक जेट्टी है, जहाँ से कोरल द्वीप के लिए नाव या फेरियां चलती हैं। इनका किराया कोई तीस-चालीस रूपये ही था, लोगो की भीड़ काफी थी, दुनिया के हर कोने से कोई न कोई इन नावों में सवार जरूर रहा होगा। टिकट ली और हमें एक बोट  बताया गया जिसपर हमें चढ़ना था। हम लाइन में लगे। थोड़ी देर में एक खली बोट किनारे पर लग गयी। बोट का नाम क्या था, अभी याद भी नहीं। बोट चल पड़ी, नीले समंदर में धूप की किरणे पड़ने के कारण जल सतह काफी चमक आसमान भी साफ़ नीला ही था। कोई आधे घण्टे में हम कोरल द्वीप के किनारे लग गए। यहाँ मुझे अपने नील और हैवलॉक द्वीप की यात्रा जो मैंने की थी, उसकी याद आ गयी। 

                         द्वीप कोई पांच से दस किलोमीटर के क्षेत्र में फैला था, पैदल घूमना संभव तो था लेकिन चिलचिलाती धूप भी थी। वैसे घूमने के लिए यहाँ करीब सौ रूपये में ऑटो, जिन्हें यहाँ टोटो कहा जाता है, उपलब्ध थी जो सिर्फ तट तक छोड़ आती थी। भाड़े के स्कूटी भी उपलब्ध थे, पूछने पर किराया उन्होंने चार सौ भाट यानि करीब आठ सौ रूपये बताये। मोल-भाव कर हमने दो स्कूटियां पांच सौ भाट यानि हजार रु में लिए, दो स्कूटी इसलिए क्योंकि हम तीन थे। उन्होंने हमें आई डी प्रूफ के तौर पर कोई भी दस्तावेज रखने माँगा, जैसे ड्राइविंग लाइसेंस पासपोर्ट की कॉपी। लेकिन हमने कुछ दिया नहीं, अब अनजान सी जगह पर किसी को ऐसे दस्तावेज देने में जोखिम भी तो था। विदेश में वाहन चलाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट की जरुरत पड़ती है, नियम अनुसार लेकिन इस छोटे से द्वीप पर कोई देखने वाला था नहीं, इस कारण कोई मुसीबत न आयी। हम भी इस टापू से उनकी गाड़ी लेकर भागते कहाँ, इसलिए कमाई  चक्कर में वे भी ज्यादा तर्क नहीं करते। 

                                हम तीनों स्कूटी से इस द्वीप के भ्रमण में निकल पड़े। रास्ते में एक सुंदर सा कोई मंदिर दिखाई दिया। फिर आगे मिला हरे-हरे घास से भरा एक छोटा सा जंगल। रुककर कुछ फोटो लिए। फिर आगे बढ़ते गए। दूर से समुद्र का एक तट दिखाई दिया, यह था नुआल तट। भीड़ काफी थी पर्यटकों की, रेस्तरां भी खूब सजे-धजे थे। यह तट भी साफ़ सुथरा और नीले रंग का था। मैंने पहले अंडमान की यात्रा जो की थी, यह तट मुझे कुछ हद तक उसके टक्कर का तो लगा, लेकिन मैं सुंदरता के मामले में अंडमान को इससे पहले ही रखूँगा। थाईलैंड में विदेशी पर्यटक खूब आते हैं, इस कारण यहाँ का हर चीज काफी प्रसिद्द है लेकिन फिर भी इसका यह मतलब नहीं की हमारे देश में इसके टक्कर की चीजें मौजूद नहीं। जहाँ बहुत अधिक पर्यटक आते हैं, वहां की नैसर्गिक खूबसूरती भी धीरे-धीरे कम होने लगती है। 

                                     आगे के इन चित्रों में आप देख सकते हैं की इसके बाद हमने कोरल द्वीप के समय तट, ताविन तटआदि का चक्कर भी लगाया। दुबारा नुआल तट पर ही हमने समंदर में डुबकी भी लगाई। शाम के चार बजे के आस-पास हम वापस पट्टाया चले गए। कुल मिलाकर पट्टाया के नजदीक का यह द्वीप मुझे काफी अच्छा लगा। अगर परिवार के साथ भी आया जाय तो यहाँ जरूर आना चाहिए। 




































इस हिंदी यात्रा ब्लॉग की ताजा-तरीन नियमित पोस्ट के लिए फेसबुक के TRAVEL WITH RD पेज को अवश्य लाइक करें या ट्विटर पर  RD Prajapati  फॉलो करें साथ ही मेरे नए यूंट्यूब चैनल  YouTube.com/TravelWithRD भी सब्सक्राइब कर लें। आप मुझे इंस्टाग्राम instagram.com/TravelWithRD पर भी फॉलो कर सकते हैं। 

Comments

  1. रोचक लेख। इधर घूमना इतना महंगा नहीं लग रहा। गोवा वगैरह में भी स्कूटी के रेट लगभग इतने ही रहते हैं। अगली कड़ी का इंतजार रहेगा।

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद विकास जी!!!

      Delete
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (07-10-2018) को "शरीफों की नजाकत है" (चर्चा अंक-3117) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

Which is the best berth in trains: Lower, Middle or Upper?

Which is the best berth in trains? You have mainly three choices in trains: lower, middle and upper berths. There are also side lower and side upper berths. In this post, we will be going to discuss about advantages and disadvantages of different types of train berths. However, different types of travelers may need or prefer a particular type of berth according to their ages, interests or physical conditions. Top 5 Flight Booking Sites in India for Domestic & International flights As you already know that there are many types of coaches in Indian trains like general, 2nd seating, AC chair car, sleeper, 3rd AC, 2nd AC and 1st AC. The general, 2nd seating or AC chair car coaches do not have the facility of sleeping. They are best suitable for day time journey. Thereafter, sleeper, 3rd AC, 2nd AC and 1st AC coaches have the facility of sleeping and comfortable for long and very long overnight journeys. The berths orientation in the sleeper and 3rd AC coaches are exactly same, only dif

क्या थाईलैंड में सेक्स टूरिज्म या देह व्यापार क़ानूनी है? Is sex tourism legal in Thailand?

थाईलैंड टूरिज्म: एक नजर दोस्तों जैसा की आप यह भली भांति जानते हैं की थाईलैंड tourism दुनिया भर में काफी लोकप्रिय है जिसका प्रमुख कारण वहां का sex tourism या देह व्यापार है। थाईलैंड में घूमने के लिए तो बहुत सारी चीजें हैं- जैसे खूबसूरत sea beaches, मंदिर, पुराने स्मारक या historical monuments वगैरह। लेकिन फिर भी ऐसा माना जाता है की मुख्यतः लोग वहां जिस चीज के लिए जाते हैं वो sex tourism ही है, बाकी सभी चीजें secondary है या उतने important नहीं हैं। थाईलैंड यात्रा: कोलकाता से बैंकाक (Thailand Trip: Kolkata to Bangkok) बैंकाक से पटाया (Bangkok to Pattaya) पटाया की एक शाम और कोरल द्वीप की सैर (Walking Street and Coral Island, Pattaya) बैंकाक शहर- वाट फ़ो और वाट अरुण (Bangkok City: Wat Pho and Wat Arun) Buy Thailand 4G SIM(Siam Center, BKK or DMK Airport Pick Up) कुछ लोग ऐसे भी कहते मिलेंगे की एक बार थाईलैंड जाने के बाद character certificate बनवाना पड़ेगा क्योंकि वहां जाने का मतलब है चरित्र में दाग लगना ! वैसे ये कुछ conservative या पुराने ख्यालात वाले लोग ही कह सकते हैं, क्यों

Top 4 waterfalls of Jharkhand- Hundru, Dassam, Hirni and Jonha

When the word ‘Jharkhand’ comes in our mind, we think forest, greenery, hills, valley, rivers etc. Jharkhand is such a state in our country which is very rich in mines and minerals, flora and fauna, but unfortunately, due to whatever reason, tourism has not sprouted here like other Indian states. This is still a tourist deficient region but in no way it ever means that it has not the capability to attract the mass. Jharkhand has almost every package that any traveler needs, it has a lot of possibilities in tourism. Jharkhand has got everything from the mother nature, but lacks only the fundamental and infrastructural development.   Hills and Valleys of Jharkhand- Parasnath, Netarhat, Dalma and Kiriburu. Panchghagh Falls: The safest waterfall near Khunti-Ranchi in Jharkhand  As I have already mentioned that Jharkhand has everything- hills, waterfalls, valley, rivers, but this post will be dedicated to the waterfalls of Jharkhand. This Indian state is fully a plateau landscape. In the ra