ये हंसी वादियाँ आ गए हम कहाँ- ऊटी (Romance of Ooty)

बात अगर हसीं वादियों की की जाय तो सिर्फ हिमालयी चोटियाँ ही इनमें शुमार नहीं हैं, बल्कि दक्षिण भारतीय चोटियों का सौंदर्य भी बिल्कुल ही अनूठा है। तमिलनाडु के नीलगिरि पर्वतश्रेणी के ऊटी एवं कन्नूर भी प्रकृति के ऐसे ही सुंदरता का बखान करते हैं। कोयंबटूर से 80 किमी की यात्रा कर ज्यों ही हमने

आईये जानें आखिर कैसी होती है गोवा की नशीली शाम (Goa Part IV)

ये शाम मस्तानी…. मदहोश किये जा…. मुझे डोर कोई खींचे जी हाँ गोवा की शाम कुछ ऐसे ही झूमने और नाचने को मजबूर करेगी आपको। ब्लू पानी, चर्च, कोको ट्री ये सब तो भई दिन के नजारे हैं। यहाँ तो शामें भी काफी नशीली और रंगीन हुआ करती हैं! जैसे ही दिन ढलता है, गोवा

गोवा के कुछ ऐतिहासिक पन्ने (Goa Part III)

क्या गोवा का नाम सुनते ही आपके मन में सिर्फ नारियल पेड़ और समुद्र तटों का ही ख्याल आता है? गोवा का एक अन्य ऐतिहासिक पहलु भी है जिसे आप वहां की गिरिजाघरों और स्मारकों में महसूस कर सकते हैं। लगभग 450 वर्षों तक पुर्तगाली साम्राज्य रहने के यहाँ अनेक गवाह मौजूद हैं।  सबसे पहले आपको

गोवा के कुछ मनोहारी समुद्रतट (Goa Part II)

तो खैर ट्रेन की हेराफेरी के बाद पहली उड़ान के दम पर हम मुंबई आये और बस मार्ग से गोवा की ओर रवाना हुए। पुरे रास्ते भर नारियल पेड़ों का सौंदर्य और हरियाली देखकर तो चित्त प्रसन्न हो उठा। मन ही मन इन्ही नारियल पेड़ों को देखकर गोवा की एक काल्पनिक छवि दिलो-दिमाग में उभर

ट्रेन की हेराफेरी जिसने दिया हमें पहली उड़ान का आपातकालीन मौका..मौका…(Goa Part I)

आज मैं आपसे बयाँ करने जा रहा हूँ एक ऐसी जमीनी हेराफेरी की,  जिसने हमें पहली बार आसमान में उड़ने का मौका दिया। बात पांच साल पहले की है जब मैंने घूमना शुरू किया था। मेरे एक दोस्त अरुण के साथ गोवा जाने का कार्यक्रम तय हुआ। जाना ट्रेन से ही था, मुम्बई होते हुए,

एक सफर नदी की धाराओं संग (River Rafting In The Swarnarekha River, Jamshedpur)

आज का यह लेख तो आपको जरूर कुछ न कुछ नया आजमाने को विवश कर ही देगा। बस और ट्रेन में सफर तो लोग हर रोज करते होंगे, लेकिन इस सफर में ऐसा क्या है भला?  आखिर ऐसा क्या अलग लिखने जा रहा हूँ मैं, एक नदी की धाराओं संग बहे कुछ यादगार लम्हों को